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29 जून 2010

कॉमनवेल्थ गेम्सःरोजगार के नए अवसर

कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के लिए राजधानी दिल्ली में विकास की बयार तो बह ही रही है, लेकिन इसके साथ साथ रोजगार के जो अवसर दिखाई दे रहे हैं, उसे लेकर युवा खासे उत्साहित हैं। हालांकि इसमें से अधिकतर नौकरियां अस्थायी होंगी, लेकिन नए और प्रशिक्षु छात्रों को जो अनुभव मिलेगा, वह उनके करियर में शुरुआती अनुभव की भूमिका निभा सकता है। इतना ही नहीं, गेम्स के दौरान आयोजन समिति द्वारा वॉलंटियर भी तैयार किए जा रहे हैं, इन्हें कोई मानदेय तो नहीं मिलेगा, लेकिन इस दौरान मिला परीक्षण भविष्य में इन युवाओं को काफी लाभ देगा।

दो साल पहले जब गेम्स की तैयारियां शुरू हुई तो उस समय उद्योग वाणिज्य संगठन एसोचैम ने एक सर्वे कर दावा किया था कि गेम्स के दौरान पांच लाख नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। एसोचैम के मुताबिक एविएशन और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर में यह अवसर मिलेंगे।

हालांकि सर्वे के कुछ दिन बाद वैश्विक मंदी की चपेट में भारत के आने के बाद तस्वीर पलट गई। होटल इंडस्ट्री, टूर एंड ट्रेवल्स बिजनेस के साथ-साथ लगभग सभी धंधे इससे प्रभावित हुए हैं। ऐसे में नौकरी के अवसर भी एसोचैम के दावों के विपरीत कम हुए हैं।

आयोजन समिति में नौकरी के अवसर
खेलों के आयोजन के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति का गठन किया गया। इस समिति में नियुक्तियों का दौर चालू है। अकेले समिति में अभी 700 से अधिक प्रोफेशनल्स काम कर रहे हैं, जबकि आयोजन समिति द्वारा भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

इनमें समिति के प्रशासकीय अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा गेम्स सर्विस, वेन्यू ऑपरेशन, खेल गतिविधियां, टैक्नोलॉजी, प्रशिक्षण से जुड़ी नौकरियां शामिल हैं। इनमें खासकर प्रोजेक्ट अफसर, डायरेक्टर जैसे बड़े पदों पर कांट्रेक्ट बेस पर नौकरी दी जा रही है।

हॉस्पिटेलिटी के क्षेत्र में अवसर
गेम्स के मद्देनजर जिस क्षेत्र में सबसे अधिक रोजगार की संभावना है, वह है हॉस्पिटेलिटी । गेम्स के दौरान एक लाख से अधिक विदेशी और चार लाख से अधिक देशी सैलानियों के दिल्ली में आने की संभावना है। इन लोगों को ठहराने के लिए जहां नए होटल, पुराने होटलों का विस्तार, गेस्ट हाउस बन रहे हैं, वहीं दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम के तहत सीधे लोगों को रोजगार का अवसर दिया गया है।

एसोचैम ने जब सर्वे किया था तो उस समय यह तथ्य सामने आया था कि अकेले इस क्षेत्र में डेढ़ लाख से अधिक रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि विषम परिस्थतियों के चलते यह सर्वे अब तर्कसंगत नहीं लगता, लेकिन फिर भी इस क्षेत्र में अच्छी खासी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। नए होटलों में नई भर्तियां हो रही हैं और पुराने होटलों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जा रही है, इनमें शैफ से लेकर रूम सर्विस, फ्रंट स्टाफ सर्विस के अलावा सुपरवाइजर, मैनेजर आदि शामिल हैं।

आईटीडीसी को तलाश है 700 छात्रों की
भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) ने दिल्ली के दस बड़े कॉलेजों से 700 छात्रों की कैंपस भर्ती का फैसला लिया है, इनको हॉस्पिटेलिटी एग्जीक्यूटिव का तौर पर नियुक्त किया जाएगा। ये छात्र आईटीडीसी द्वारा संचालित होटल अशोक, होटल जनपथ और होटल सम्राट जैसे प्रतिष्ठित होटलों में अपने करियर की शुरुआत करेगे।

इनमें से कुछ छात्रों को वसंत कुंज में बन रहे गेम्स फ्लैटों में भी रहने वाले सैलानियों के लिए तैनात किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से छात्रों को आईटीडीसी से जुड़ने का सपना पूरा हो सकता है। इन्हें पांच माह के लिए नियुक्त किया जाएगा और मानदेय दिया जाएगा।

टूर एवं ट्रैवल्स में हैं अवसर
खेलों की वजह से हॉस्पिटेलिटी के बाद टूर एवं ट्रेवल्स में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मंदी की वजह से इस सेक्टर में लगभग डेढ़ साल तक निराशा का दौर रहा, लेकिन गेम्स से पहले यह दौर खत्म होने वाला है। देसी और विदेशी सैलानियों को दिल्ली सहित भारत के अन्य पर्यटन स्थलों में लाने ले जाने के लिए ट्रेवल्स एजेंसियां अभी से अपनी तैयारियां कर रही हैं। इन एजेंसियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है। कॉमनवेल्थ देशों का इतिहास के जानकारों को पसंद किया जा रहा है।

टूर गाइड बनकर करें शुरुआत
खेलों के दौरान आने वाले सैलानियों के लिए टूर गाइडों की अच्छी संख्या दरकार रहेगी। इस क्षेत्र में लोग अपने अपने स्तर पर भी दिल्ली के पर्यटन स्थलों पर टूर गाइड का काम कर सकते हैं, साथ ही टूर गाइड उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों से भी जुड़ सकते हैं। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने लगभग 4000 गाइडों को लाइसेंस देने की घोषणा की है, जिन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान विशेष रूप से तैनात किया जाएगा।

बन जाएं पुलिस
दिल्ली की सुरक्षा का भार संभालने वाली दिल्ली पुलिस में भी नौकरियों के अवसर हैं। दिल्ली पुलिस के अधिकारी कहते हैं कि गेम्स को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा प्रदान करने के लिए नई नियुक्तियां की जानी हैं। खासकर खाली पड़े पदों को भरा जाना है और कांस्टेबल व सब इंस्पेक्टरों की नई भर्ती करनी है। मौका अच्छा है उन युवाओं के पास, जो खाकी पहनने का सपना पाले हुए हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस इतनी आसानी से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करती।

एविएशन में भविष्य
गेम्स को लेकर एक बड़े क्षेत्र से भी उम्मीद हैं। एविएशन सेक्टर को उम्मीद है कि विदेशी सैलानियों से उनका कारोबार बढ़ेगा और इसके लिए प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियां भी अस्थायी तौर पर कर्मचारियों की नियुक्ति करने जा रही हैं। एयर होस्टेज से लेकर एविएशन इंजीनियर, क्रू स्टाफ, बुकिंग स्टाफ जैसे पदों पर नियुक्ति के आसार बने हुए हैं। माना जा रहा है कि इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट में नया टर्मिनल बन चुका है और अब एयरलाइंस कंपनियां भी अपने विस्तार की तैयारियों में जुट गई है।

इवेंट मैनेजमेंट व विज्ञापन एजेंसियों में भविष्य
इंवेंट मैनेजमेंट में भी खासे व्यापक अवसर पैदा होने के आसार हैं। गेम्स के दौरान होने वाले कार्यक्रम हों या गेम्स देखने आने वाले सैलानियों के मनोरंजन का इंतजाम। इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियां किसी तरह पीछे रहने वाली नहीं, वे कर्मचारियों की भर्ती कर रही हैं। कलाकारों के संपर्क में हैं। इसके अलावा, विज्ञापन एजेंसियां भी पूरी तैयारी कर रही हैं। अपने विस्तार के साथ साथ कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना और प्रोफेशनल्स का चुनाव करने में लगी हैं। विज्ञापन एजेंसियों का भविष्य काफी उज्जवल है। ऐसे में ये एजेंसियां युवाओं की पसंद बनी हुई हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अवसर
कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नौकरी का अवसर मिलेगा। सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे पॉली क्लीनिकों में कांट्रेक्ट बेस पर कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी, वहीं अस्पतालों की क्षमता बढ़ने के साथ ही कर्मचारियों की तैनाती भी संभव है। मेडिकल टूरिज्म का केंद्र बन चुकी दिल्ली में प्राइवेट अस्पताल भी अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं। अनुमान है कि खेलों के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में 1000 से अधिक भर्तियां होंगी, जबकि प्राइवेट सेक्टर में भी रोजगार के अवसर दिख रहे हैं।

गेम्स प्रोजेक्टों में मिला अवसर
गेम्स के लिए सज रही दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े इंजीनियर, मैनेजर, वर्कर्स के तौर पर हजारों लोगों को रोजगार मिला है। ये लोग विभिन्न कांट्रेक्टर्स के पास काम कर रहे हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट हो या फ्लाइओवर या सड़कों के सौंदर्यीकरण, हजारों लोग काम करते हुए दिख जाएंगे। खेलों के दौरान भी कई ऐसे प्रोजेक्ट चलेंगे, जो नौकरियों की तलाश कर रहे युवाओं की इच्छा पूरा कर सकते हैं।

यानी कॉमनवेल्थ गेम्स की वजह से दिल्ली की तस्वीर ही नहीं बदलेगी, बल्कि कई लोगों की तकदीर भी बदल
जाएगी। हालांकि इसमें ज्यादातर नौकरियां अस्थायी हैं, लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं, गेम्स के बाद भी लोगों को नौकरी पर रखेंगे। इसके अलावा, वॉलिंटियर और एनसीसी कैडेट के रूप में तैनात युवाओं को भी जीवन का पाठ पढ़ने का मौका मिलेगा(हिंदुस्तान,दिल्ली,28.6.2010)।

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