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30 जून 2010

गांव जाने वाले डॉक्टरों को उत्तराखंड देगा एक लाख

सब कुछ योजना के तहत चला तो सूबे के दुर्गम और अति दुर्गम इलाकों में अब डॉॅक्टरों की कमी नहीं रहेगी। यहां तैनात होने वाले डॉॅक्टरों को वेतन के अलावा इंसेंटिव भी मिलेगा। यह रकम एक लाख भी हो सकती है। सरकार ने इस बारे सैद्धांतिक सहमति दे दी है। सूबे में डॉक्टरों की बेहद कमी है। स्वीकृत पदों में आधे रिक्त पड़े हैं। कई अस्पतालों में तो आज तक डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं हुई। नतीजा यह है कि ये या तो अर्से से बंद है या फिर फार्मासिस्टों से काम चलाया जा रहा है। देखा जाए तो इस स्थिति के लिए राज्य सरकार खुद जिम्मेदार है। सूबे में तैनाती को लेकर किसी पॉलिसी का अब तक नहीं बन पाना इसका सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। पहाड़ों पर डॉक्टर कैसे रुकें इस दिशा में सरकार ने प्रयास और प्रयोग भी खूब किए। बीते दिनों संयुक्त समीक्षा में केंद्र ने निर्णय लिया कि इन इलाकों में किसी भी कीमत पर डॉक्टरों की तैनाती की जाए। भले एक लाख तक ही क्यों न खर्च कराना पड़े। हालांकि राज्य सरकार का मानना है कि सूबे में 60 से 70 हजार में यह संभव है। केंद्र की मंशा को ध्यान में रखते हुए निदेशालय ने शासन को एक प्रस्ताव भेज सुगम, दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों का वर्गीकरण करने का आग्रह किया है। सूबे में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के निदेशक पीयूष सिंह के मुताबिक अब शासन की हरी झंडी का इंतजार है(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,30.6.2010)।

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