जेबें खाली करो और डिग्री हासिल करो का चलन हमारी शिक्षा व्यवस्था के साथ वर्तमान पीढ़ी को पतन की ओर ले जा रहा है। यह कहना है इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. केएस तिवारी का। वे मंगलवार को इग्नू कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में विभिन्न संस्थाओं का कुकुरमुत्तों की तरह उग कर शिक्षा का निम्न स्तरीय व्यवसायीकरण चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि भोपाल समेत प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो इसके लिए इग्नू राष्ट्रीय कार्यक्रमों का विस्तार करते हुए प्रबंधन एवं बीएड पाठ्यक्रम को प्रदेश भर में बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब बीएड पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी तरह के सेवारत शिक्षक कर सकते हैं। मप्र सरकार की पहल पर शासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को शासन द्वारा 6 हजार रुपए वित्तीय सहायता दी जा रही है। ऐसे शिक्षक जो किसी कारणवश बीएड नहीं कर पाए थे, ऐसे शिक्षक अब नौकरी में रहते हुए दूरवर्ती शिक्षा पद्धति से बीएड कर सकते हैं। इग्नू का यह पाठ्यक्रम सीटीई से मान्य है। इसके साथ उनका कहना था कि इसी क्रम में इग्नू एमबीए पाठ्यक्रम अब नए स्वरूप मे प्रस्तुत कर रहा है। जो कि एआईसीटीसी से मान्य है। इन दोनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु 22 अगस्त 2010 तक प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी। बीएड के लिए प्रदेश के सभी शासकीय कालेजों के साथ निजी बीएड कालेज को केंद्र बनाया जाएगा। इनके केंद्र भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, खंडवा, देवास, उज्जैन, खरगोन समेत छतरपुर में स्थापित है(दैनिक जागरण,भोपाल,30.6.2010)।
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