डीयू से एमए , एमफिल की पढ़ाई करने वाले टॉपर्स को अब पीएचडी में एडमिशन के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। ये स्टूडेंट्स कई महीनों से ज्यॉग्रफी डिपार्टमेंट के चक्कर काट रहे हैं और हर लेवल पर शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद उनकी समस्या का कोई हल नहीं निकल रहा।
सूर्या तिवारी ने 2008 में एमए में टॉप किया था और यूनिवर्सिटी ने उन्हें गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया , लेकिन अब डिपार्टमेंट गोल्ड मेडल पाने वाले स्टूडेंट को भी पीएचडी में एडमिशन के लायक नहीं समझ रहा है। खास बात यह है कि सूर्या समेत 6 स्टूडेंट्स ने पीएचडी एडमिशन के लिए इंटरव्यू क्लियर किया था और उसके बाद इन सबका नाम प्रोविजनल एडमिशन की लिस्ट में था लेकिन बाद में इन सभी का एडमिशन कन्फर्म नहीं किया गया।
इन स्टूडेंट्स की लड़ाई में अब दूसरे स्टूडेंट्स भी साथ आ गए हैं और गुरुवार को दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में ज्यॉग्रफी डिपार्टमेंट के बाहर प्रदर्शन करने की प्लानिंग की गई है। इन छह कैंडिडेट्स ने ने डिपार्टमेंट रिसर्च कमिटी ( डीआरसी ) का इंटरव्यू क्लियर किया , सिलेक्टेड कैंडिडेट की लिस्ट में भी नाम आया लेकिन एडमिशन कन्फर्म करने के लिए इनका नाम बोर्ड ऑफ रिसर्च स्टडीज ( बीआरएस ) के पास नहीं भेजा गया।
खास बात यह है कि इन छह स्टूडेंट्स के पास स्कॉलरशिप भी है। सूर्या ने यूजीसी की प्रतिष्ठित जूनियर रिसर्च फेलोशिप ( जेआरएफ ) हासिल की है और पीएचडी रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी यूनिवर्सिटी टीचिंग असिस्टेंटशिप ( यूटीए ) भी उनके पास हैं लेकिन डिपार्टमेंट को ये नाकाफी लग रहा है। राजेश कुमार अभय ने बताया कि उनके पास राजीव गांधी नैशनल फेलोशिप है और वह कॉलेजों में एडहॉक बेसिस पर पढ़ा भी रहे हैं। लेकिन डिपार्टमेंट ने सिलेक्शन करने के बाद नाम हटा दिया।
गौरी गुप्ता का भी ऐकडेमिक रेकॉर्ड शानदार है और उन्होंने भी यूटीए हासिल कर रखी है लेकिन उनका नाम भी बीआरएस को नहीं भेजा गया। ये स्टूडेंट्स वाइस चांसलर से मिले हैं और उन्होंने कुछ दिन में मामला सुलझाने का आश्वासन दिया है।
खास बात यह है कि वाइस चांसलर प्रो . दीपक पेंटल भी मानते हैं कि स्टूडेंट्स की मांग जायज है। उन्होंने बताया कि वे डिपार्टमेंट हेड से बात करेंगे और इस मसले को हल करने को कहेंगे। प्रो . पेंटल का कहना है कि स्टूडेंट्स ने जो रेकॉर्ड दिखाए हैं , उनसे लगता है कि इन स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलना चाहिए(NBT,16.6.2010)।
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