इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) ने फैसला किया है कि स्टूडेंट्स अगर चाहें तो अपनी रीजनल लैंग्वेज में भी एग्जाम
दे सकते हैं। यूनिवर्सिटी के मुताबिक अभी स्टूडेंट्स आमतौर पर हिंदी या इंग्लिश मीडियम में एग्जाम देते हैं लेकिन अब किसी भी रीजनल लैंग्वेज में एग्जाम देने का ऑप्शन भी मिलेगा।
इग्नू के वाइस चांसलर प्रोफेसर वीएन राजशेखरन पिल्लई के मुताबिक यूनिवर्सिटी के 60 रीजनल सेंटर हैं और 30 लाख से अधिक स्टूडेंट्स हैं। पूरे देश में यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स हैं और स्टूडेंट्स को रीजनल लैंग्वेज में पढ़ने का मौका भी दिया जाना चाहिए और इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक शुरुआत में तो स्टूडेंट्स को हिंदी या इंग्लिश में ही क्वेश्चन पेपर मिलेगा लेकिन बाद में रीजनल लैंग्वेज में भी क्वेश्चन पेपर जारी किए जाएंगे। इस बारे में एक्सरसाइज शुरू भी हो गई है। इग्नू में साल में दो बार एग्जाम होता है। पहली जून से 30 जून और पहली दिसंबर से 31 दिसंबर तक एग्जाम कंडक्ट किए जाते हैं(NBT,14.6.2010)।
दे सकते हैं। यूनिवर्सिटी के मुताबिक अभी स्टूडेंट्स आमतौर पर हिंदी या इंग्लिश मीडियम में एग्जाम देते हैं लेकिन अब किसी भी रीजनल लैंग्वेज में एग्जाम देने का ऑप्शन भी मिलेगा।
इग्नू के वाइस चांसलर प्रोफेसर वीएन राजशेखरन पिल्लई के मुताबिक यूनिवर्सिटी के 60 रीजनल सेंटर हैं और 30 लाख से अधिक स्टूडेंट्स हैं। पूरे देश में यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स हैं और स्टूडेंट्स को रीजनल लैंग्वेज में पढ़ने का मौका भी दिया जाना चाहिए और इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक शुरुआत में तो स्टूडेंट्स को हिंदी या इंग्लिश में ही क्वेश्चन पेपर मिलेगा लेकिन बाद में रीजनल लैंग्वेज में भी क्वेश्चन पेपर जारी किए जाएंगे। इस बारे में एक्सरसाइज शुरू भी हो गई है। इग्नू में साल में दो बार एग्जाम होता है। पहली जून से 30 जून और पहली दिसंबर से 31 दिसंबर तक एग्जाम कंडक्ट किए जाते हैं(NBT,14.6.2010)।
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