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30 जून 2010

महाराष्ट्र:आईआईटी में खाली पड़ी ओबीसी सीटें सामान्य वर्ग में

जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) की आयोजन समिति के सूत्रों ने जानकारी दी है कि ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए आरक्षित कम से कम 469 सीटें आईआईटी की पहली सूची के बाद खाली रह गई हैं। अधिकांश प्रत्याशी कट-ऑफ (न्यूनतम अंक) मार्क में छूट के बावजूद उतने नंबर नहीं ला सके। वहीं, कई अपना ओबीसी स्टेटस साबित नहीं कर सके। सभी पुराने आईआईटी इस वर्ष ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण लागू कर रहे हैं। आठ नए आईआईटी ये कोटा इकट्ठे ही लागू करेंगे।

जेईई आयोजन समिति के अध्यक्ष और आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर टीएस नटराजन ने कहा, ‘आईआईटी ने ओबीसी के लिए 2,570 सीटें रखी हैं। इनमें केवल 2,023 सीटें ही भरी गईं हैं। कई प्रत्याशी कट-ऑफ नंबर नहीं ला पाए, तो कई ओबीसी प्रमाणपत्र नहीं दे पाए। कई ओबीसी प्रत्याशी सामान्य वर्ग के प्रत्याशी के तौर पर सफल हो जाते हैं। इस वर्ष 469 सीटें सामान्य वर्ग के तौर पर भरी गई हैं।’ इन 2,570 सीटों में 78 यानी तीन फीसदी विकलांग प्रत्याशियों के लिए आरक्षित हैं। इसलिए बची 2,492 सीटों में से 2,023 ही भर सकीं। इस वर्ष कुल ,27,760 ओबीसी प्रत्याशियों ने जेईई दी। इसमें 2,357 ही सफल हुए। लगभग 200 प्रत्याशियों की कमी तो वैसे ही हो गई। सफल 2,357 प्रत्याशियों में से 868 अंकों में लगभग 10 फीसदी की छूट के बाद सफल हुए। हालांकि, छूट के बावजूद सभी सीटें नहीं भरी जा सकीं।

पिछले वर्ष लगभग 1,949 ओबीसी प्रत्याशी कुल 1,594 सीटों के लिए सफल हुए थे। इनमें 51 सीटें सामान्य वर्ग में बदल गई थीं। इसी तरह, एसटी प्रत्याशियों के लिए 212 सीटें इस साल भरी जा सकीं। एससी/एसटी प्रत्याशियों को शारीरिक तौर पर विकलांग प्रत्याशियों के साथ सामान्य वर्ग के आखिरी उम्मीदवार के मुकाबले 50 फीसदी की छूट मिलती है। इसके साथ ही और 50 फीसदी की छूट उनको मिलती है, जो सफल नहीं हो पाते, ताकि वे एक वर्षीय प्रिपरेटरी कोर्स में दाखिला ले सकें

इस वर्ष एसटी की 712 सीटों के लिए 15,975 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी। इसमें केवल 517 नामांकन के लिए सफल हो सके। इनमें से 498 का दाखिला 50 फीसदी छूट देने के बाद हुआ था। प्रोफेसर नटराजन ने बताया कि विकलांग प्रत्याशियों की 90 सीटें भरी नहीं जा सकीं और इनको प्रिपरेटरी कोर्स में बदल दिया गया। एससी सीटों के मामले में छह अभी भी खाली हैं। 2009 में एससी और एसटी की लगभग 1,000 सीटें खाली रह गई थीं(Dainik Bhaskar,Maharashtra,30.6.2010)।

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