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27 जुलाई 2010

न्यायिक अफसर 20 साल की सेवा के बाद ही पा सकेंगे पेंशन

अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारी अब 20 साल की सेवा के बाद पेंशन के हकदार होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पद्मनाभन समिति की सिफारिशों को मंजूर करते हुए यह व्यवस्था दी है। अभी 33 साल की सेवा अवधि के बाद इन्हें पेंशन का पात्र माना जाता है। न्यायिक ढांचे से संबंधित मामलों की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश एसएच. कपाडि़या की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने नियुक्त समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया। सुप्रीम कोर्ट के 30 अप्रैल 2009 के आदेश पर मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ई. पद्मनाभन की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया गया था। इसने जुलाई 2009 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। समिति ने न्यायिक अधिकारियों को दी जाने वाली पेंशन की पात्रता के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 33 से घटाकर 20 साल करने की सिफारिश की थी। समिति की यह सिफारिश भी मान ली गई कि पेंशन के तौर पर अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाए। न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन की सदस्यता वाली इस पीठ ने गे्रच्युटी की सीमा भी 3.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने पर मुहर लगा दी। पद्मनाभन समिति ने वर्ष 1999 में बने पहले राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की ही तरह न्यायिक अधिकारियों के वेतन में भी तीन गुना वृद्धि की सिफारिश की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मई में राज्य सरकारों को समिति की सिफारिशों के अनुरूप वेतन देने का निर्देश दिया था। अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ ने भी सुप्रीम कोर्ट से समिति की सिफारिशें लागू करने की मांग की थी(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,27.7.2010)।

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