सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेना से वह सरकारी अधिसूचना पेश करने के लिए कहा है जिसमें महिला अधिकारियों को सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन देने पर रोक है। न्यायमूर्ति जेएम पंचाल और न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्र की पीठ ने सेना को अधिसूचना और अन्य प्रासंगिक सामग्री पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। बल की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पराग त्रिपाठी ने कहा कि सेना के नियम जज एडवोकेट जनरल और शिक्षा विभाग की शाखाओं में महिला अफसरों के लिए स्थायी कमीशन की मंजूरी देते हैं। सेना ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें सशस्त्र बलों को उनमें सेवारत महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह आदेश 12 मार्च को दिया था। सेना ने इस आदेश के खिलाफ अपील, हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा सेना प्रमुख और रक्षा मंत्रालय को अपने आदेश की अनुपालना न करने के लिए अवमानना नोटिस जारी किए जाने के एक दिन बाद की। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह संक्षिप्त सेवा कमीशन में सेवारत महिलाओं को स्थायी कमीशन देने की अनुमति दे। यह आदेश हाईकोर्ट ने सेना और वायु सेना की 60 से अधिक सेवारत एवं सेवानिवृत्त महिला अधिकारियों की याचिकाओं के समूह पर दिया। पीठ ने यह भी कहा कि महिला अधिकारियों के साथ पुरुष अधिकारियों जैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए। पीठ ने महिला अधिकारियों की लड़ाकू अभियानों में जाने की अनुमति देने संबंधी अपील ठुकरा दी थी(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,27.7.2010)।
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