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01 जुलाई 2010

बिहार में विवि शिक्षक-कर्मियों को यूजीसी का वेतन

बिहार में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के शिक्षको, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों व न्यायिक सेवा के अधिकारियों को पहली जनवरी 2006 के प्रभाव से पुनरीक्षित वेतन मिलेगा। बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गयी। वेतनआदि की मांग को लेकर विश्र्वविद्यालयों के कर्मचारियों ने एक जुलाई से हड़ताल का एलान किया है। मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि विश्र्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों को पहली जनवरी 2006 के प्रभाव से विश्र्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की अनुशंसा के आलोक में पुनरीक्षित वेतन देने का निर्णय किया गया है। वहीं शिक्षकेत्तर कर्मियों को भी राज्य के सरकारी सेवकों की भांति पहली जनवरी 06 के प्रभाव से पुनरीक्षित वेतन देने का निर्णय किया गया है। मगर शिक्षकेत्तर कर्मियों को 1 अप्रैल 2007 के प्रभाव से राज्यकर्मियों की भांति आर्थिक लाभ मिलेगा। वेतन वृद्धि के फलस्वरूप बकाये वेतन का भुगतान सरकारी सेवकों की भांति पांच किश्तों में किया जायेगा। मंत्रिमंडल समन्वय विभाग के प्रधान सचिव अफजल अमानुल्लाह ने बताया कि विवि के मामले में पहले से गठित कमेटी काम कर रही है। दो दिनों में उसकी रिपोर्ट आ जायेगी। कैबिनेट ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग के प्रधान सचिव भानू प्रताप शर्मा ने बताया कि न्यायमूर्ति पद्मनाभन कमेटी की अनुशंसा और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में पहली जनवरी 2006 के प्रभाव से पुनरीक्षित वेतन देने का निर्णय किया गया है। बकाया 40 फीसदी राशि भविष्य निधि खाते में जमा करा दी जायेगी। शेष राशि दो किस्तों में अदा की जायेगी। न्यायिक सेवा के अधिकारियों के भत्ते के मसले पर कैबिनेट की अगली बैठक में निर्णय किया जायेगा। न्यायिक अधिकारियों को क्या मिलेगा : न्यायिक अधिकारियों में मुंसिफ (मूल कोटि) को 9000-14500 के बदले 27700 से 44770, कनीय वर्ग प्रथम एसीपी 10750 से 14900 के बदले 33090 से 45850, द्वितीय एसीपी 12850 से 17550 के बदले 39530 से 54010 रुपये का वेतनमान निर्धारित किया गया है। असैनिक न्यायाधीश वरीय वर्ग (प्रवेश बिन्दु) का वेतनमान 12850-17550 के बदले 39530 से 54010, वरीय वर्ग प्रथम एसीपी 14200-18350 के बदले 43690 से 56470, द्वितीय एसीपी 16750-20500 के बदले 51550 से 36070 रुपये निर्धारित किया गया है। इसी तरह जिला न्यायाधीश प्रवेश बिन्दु वालों को 16750-20500 के बदले 51550 से 63070, जिला न्यायाधीश प्रवर कोटि को 18750-22850 के बदले 57700 से 70290 और जिला न्यायाधीश अधिकाल वेतनमान को 22850 से 24850 के बदले 70290 से 76450 रुपये का पुनरीक्षित वेतनमान स्वीकृत किया गया है। कैबिनेट ने मार्च 2008 में लिये गये उस फैसले को शिथिल कर दिया है जिसमें 50 लाख रुपये से अधिक लागत वाली मशीन को आउटसोर्सिग के माध्यम से स्थापित करने का निर्णय किया गया था। जिला परिषदों के नियंत्रण वाले सभी वैसे घाटों को सरकार ने अपने अधीन करने का फैसला किया है जिसकी बंदोबस्ती पूर्व से जिला परिषदों द्वारा की जाती रही है। नाव दुर्घटना के मद्देनजर सरकार ने यह निर्णय किया है। जिला परिषदों को इससे होने वाले घाटे की भरपाई कर दी जायेगी। राज्य महादलित आयोग को चालू वर्ष में 89.43 लाख रुपये अनुदान की निकासी की मंजूरी दी गयी। मुजफ्फरपुर ताप विद्युत गृह विस्तार योजना में निवेश के लिए बिहार बिजली बोर्ड को राज्य योजना से चालू वर्ष में 60 करोड़ कर्ज की स्वीकृति दी गयी। ग्रामीण कार्य विभाग के पथों पर स्थित उच्च स्तरीय पुल निर्माण परियोजनाओं को मनोनयन के आधार पर राज्य पुल निर्माण निगम से कराने का निर्णय किया गया है। बैठक में राज्य पुस्तकालय एवं सूचना केन्द्र प्राधिकार नियमावली को हरी झंडी दे दी गयी। पूर्णिया के दालकोला में वाणिज्य-कर विभाग की समन्वित जांच चौकी स्थापित करने के लिए 28.48 करोड़ की पुनरीक्षित योजना को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी। साथ ही बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण सोसाइटी के गठन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी गयी। इससे कोसी पुनर्वास में विश्र्व बैंक से मदद लेना आसान हो जायेगा(दैनिक जागरण,पटना,1.7.2010)।

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