फौजी बिरादरी को बड़ी राहत देते हुए सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण (एएफटी) ने सरकार को समान रैंक पर एक समान युद्ध अपंगता पेंशन की व्यवस्था करने को कहा है चाहे वे किसी भी वेतन आयोग के दौरान सेवा मुक्त हुए हों। एएफटी का यह आदेश अपंगता पेंशन के लिए 2006 के पूर्व और पश्चात की मौजूदा विभाजन रेखा को खत्म करता है। इस फैसले के बाद सभी अपंगता पेंशन धारकों को एक जनवरी 2006 से लागू छठे वेतन आयोग के मुताबिक पेंशन मिलना संभव हो सकेगा। गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने 2008 में यह विभाजन रेखा तैयार की थी जिसके मुताबिक 2006 के बाद रिटायर फौजियों को अपंगता पेंशन के लाभ उन सैनिकों की तुलना में कहीं अधिक मिलते हैं जो इससे पहले रिटायर हुए हैं। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल पी.के. कपूर की याचिका पर फैसला देते हुए न्यायमूर्ति एके माथुर की अध्यक्षता वाली न्यायाधिकरण की प्रधान खंडपीठ ने अपने फैसले में रक्षा मंत्रालय को 2006 से 12 प्रतिशत ब्याज के साथ याचिकाकर्ता को बकाया पेंशन देने को भी कहा। साम्बा मामले में आरोपियों की याचिकाएं खारिज हों- सेना नई दिल्ली, प्रेट्र : सेना ने आज सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण के समक्ष दलील दी कि तीन दशक पुराने साम्बा जासूसी मामले में कथित तौर पर संलिप्त छह कर्मियों की ओर से दाखिल याचिकाओं को इस आधार पर नामंजूर कर दिया जाए कि एक उच्च अदालत ऐसे मुकदमों को पूर्व में खारिज कर चुकी है। सेना के वकील कर्नल आर बालसुब्रमण्यम (रिटायर्ड) ने कहा, मामले विचारणीय हैं या नहीं, इस पर हमने सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण के समक्ष अर्जी दाखिल की है क्योंकि चार याचिकाकर्ताओं ने ऐसे ही मुकदमे दायर किए थे, जिन्हें जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय खारिज कर चुका है। ये मामले दोबारा यहां नहीं उठाए जा सकते(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,1.7.2010)।
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