दिल्ली विश्वविद्यालय में सेमेस्टर पर उठा विवाद खत्म नहीं हुआ है। प्रशासन और शिक्षकों के बीच राजीनामा नहीं होने के कारण २६ जुलाई को फिर सुनवाई होगी।
विश्वविद्यालय शिक्षक प्रशासन द्वारा साइंस के कोर्सेज में मनमाने तरीके से लागू किए गये सेमेस्टर का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुलपति ने इसे कायदे कानून को ताक पर रखकर लागू किया है। इसलिए शिक्षकों को यह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कॉलेजों में पुराने पाठ्यक्रम के हिसाब से ही टाइम टेबल तैयार करके दिया है। शिक्षकों का कहना है कि साइंस का पुराना पाठ्यक्रम जो कि वैधानिक और न्यायसंगत है उसे ही अमल में लाएंगे। उधर प्रशासन ने सेमेस्टर लागू करने की प्रक्रिया को सही मानते हुए कॉलेजों को इसे अमल में लाने का निर्देश दिया है। कुलपति प्रो दीपक पेंटल के मुताबिक सेमेस्टर के हिसाब से टाइम टेबल तैयार करने और नया कैलेंडर को अमल करने का नोटिस कॉलेजों को भेजा जा रहा है।
शिक्षक और प्रशासन के बीच सेमेस्टर को लेकर छिड़ी इस लड़ाई की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है। बताया जाता है कि मंगलवार को भी दोनों पक्षों में सुलह नहीं हो पाया। शिक्षकों के प्रतिनिधि ने प्रशासन के पास ऑफर रखा है कि वह चाहे तो छोटे विभागों में मसलन माइक्रोबॉयलोजी, बॉयोकेमिस्ट्री और नर्सिंग आदि में इसे लागू करके प्रयोग के तौर पर देख ले। बड़े कोर्सेज में इसे अभी लागू नहीं करे। इसे लागू करने से पहले शिक्षकों से विचार विमर्श हो। सेमेस्टर लागू करने की पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाए। उधर प्रशासन साइंस में पूरी तरह से सेमेस्टर लागू करने पर अड़ा है। उसका कहना है पाठ्यक्रम की खामियां दूर करने के लिए रिव्यू कमेटी बनाई जाएगी। प्रशासन के इस ऑफर को शिक्षक फिलहाल स्वीकार्य करने के मूड में नहीं है। उनका कहना है कि इसमें कोई नई बात नहीं है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच सेमेस्टर को लेकर उठे विवाद पर अदालत में सुनवाई २६ जुलाई को होगी(अनुपम कुमार,नई दुनिया,दिल्ली,21.7.2010)।
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