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20 जुलाई 2010

सफलता के सूत्र

आज का युवा वर्ग निरंतर प्रतिद्वंद्विता के साए में जी रहा हैं। कदम कदम पर प्रतिद्वंद्वी उसकी राह रोके खड़े दिखते हैं। उसका सफर अब आसान नही हैं। हर मोड़ पर उसे परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता हैं। ऐसे में यदि वह अपने कंधों पर व्यर्थ का बोझ लादे रहेगा, तो अपना सफर कभी भी पूरा नहीं कर पाएगा और रास्ते में ही थककर बैठ जाएगा।

जिस प्रकार किसी लम्बे व महत्वपूर्ण सफर पर जाते समय आप केवल बेहद जरूरी और सीमित सामान ही लेकर चलते हैं, उसी प्रकार सफलता के इस सफर में भी आपको सही विचार और गुणों को लेकर चलना होगा जो आपके सफर को आसान करे, जिससे आप बिना किसी बाधा के अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।

याद रखें :
- जीवन में आने वाली जटिलताओं का सामना द़ृढ़ता और सूझबूझ से करें।
- क्रोध का त्याग करें। किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए शांत मन-मस्तिष्क से उसका समाधान खोजें।
- जल्दबाजी या अशांत मस्तिष्क के चलते कोई निर्णय न लें। जल्दबाजी सदा घातक होती है।
- ईर्ष्या और द्वेष आपकी बेहद मूल्यवान आंतरिक शक्ति और ऊर्जा को नष्ट करते हैं।
- अपने लाभ की बात अवश्य सोचिए लेकिन दूसरे की हानि करके नहीं। इससे आपकी प्रवृति कुटिल होगी और विचार दूषित।
- असफलता सफलता की पहली सीढ़ी होती है।
- जो जीवन में कभी नहीं हारते, उन्हें जीत की सच्ची खुशी भी हासिल नहीं होती।
- आपकी हार आपके लिए सबक होती है जिससे सीख लेकर आप वो गलती दोबारा न दोहराएं।
- सुलझे विचारों वाला व्यक्ति अपनी गलतियों से सबक लेते हैं और अन्तत: अपने लक्ष्य को पा लेते हैं।
- अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखें।
- जटिल परिस्थिति में भी खुद को शांत रखने का प्रयास करें।
- अपनी सीमाएं कभी न भूलें। हर कार्य को अपनी सीमाओ में रहकर करें।
- प्रत्येक कार्य में सूझबूझ व दूरंदेशी का परिचय दीजिए।
- अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें।
- तनाव, ईर्ष्या आलस्य, व अकुशलता जैसे दोषों को अपने जीवन में स्थान न दें।(भारती शांडिल्य,हिंदुस्तान,दिल्ली,19.7.2010)

1 टिप्पणी:

  1. यह ब्लॉग सच में अपने नाम को सार्थक कर रहा है और आप सच्चे शिक्षा मित्र है |
    यह ब्लॉग नित नई उचाइयां छुए , शुभकामनाएँ |

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