झारखंड लोक सेवा आयोग ने एक बार फिर प्रदेश के बेरोजगार छात्रों को चौंकाया है। आयोग द्वारा चौथी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने के लिए अधिकतम आयु सीमा का निर्धारण वर्तमान वर्ष से कर दिया गया है। रिक्तियां बैकलाग की हैं, जबकि यह परीक्षा तीन साल बाद होने जा रही है। इससे इस परीक्षा में शामिल होने से हजारों छात्र वंचित रह जाएंगे। आयोग द्वारा इस परीक्षा के लिए जारी विज्ञापन में उम्र सीमा के बारे में कहा गया है कि जिस महीने में परीक्षा होगी, उसके पूर्ववर्ती पहली अगस्त से आवेदक की उम्र जोड़ी जाएगी। इस हिसाब से आयोग यदि संभावित तिथि के अनुसार अगले वर्ष 8 से 15 जनवरी तक प्रारंभिक परीक्षा लेता है तो आयु की गणना 1 अगस्त 2010 से की जाएगी। ऐसे में उन बेरोजगार छात्रों का क्या होगा, जो जेपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा की तैयारी को लेकर अपना सबकुछ दांव पर लगा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि झारखंड गठन के दस वर्ष बाद तक आयोग अभी तक दो सिविल सेवा परीक्षा ही अंतिम रूप से ले सका है। तृतीय सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का परिणाम एक वर्ष के बाद जारी किया गया और साक्षात्कार जारी है। तृतीय सिविल सेवा परीक्षा में भी आयु सीमा के कट आफ डेट को लेकर काफी हंगामा मचा था। आयोग ने इस परीक्षा के लिए आयु सीमा का कट आफ डेट 1 अगस्त 2007 निर्धारित कर दिया गया था, जबकि यह परीक्षा तीन वर्ष बाद हो रही थी। छात्रों की मांग थी कि कट आफ डेट को 1 अगस्त 2005 किया जाए। छात्रों की मांग पर तत्कालीन मुख्य मंत्री मधु कोड़ा ने इसे लेकर आश्र्वासन भी दिया था, लेकिन बाद में कुछ भी नहीं हुआ। पूर्व की तीनों परीक्षाओं में आयु सीमा का कट आफ डेट प्रथम सिविल सेवा परीक्षा : 1 अगस्त 2002, द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा : 1 अगस्त 2004, तृतीय सिविल सेवा परीक्षा : 1 अगस्त 2007 विज्ञापन में त्रुटियां चौथी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए जारी विज्ञापन में भी त्रुटियां हैं। झारखंड प्रशासनिक सेवा में कुल पद 106 बताया गया है, जबकि अनारक्षित 31, अजजा के लिए 08, अजा के लिए 08, बीसी-1 के लिए 19 तथा बीसी-2 के लिए 14 पद ही बताए गए हैं। ऐसे में कुल पदों की संख्या 80 ही होती है। जेपीएससी का .. संशोधित नंबर 52, 55 व 53 हो गया। इसका कुल योग 160 अंक होता है। अगर कुल योग 160 रहता तब भी प्रकाश कुमार का चयन कट ऑफ मार्क के आधार पर नहीं हो सकता था। इसलिए 52, 55 व 53 का कुल योग 160 के बदले 180 कर दिया गया और प्रकाश कुमार सिविल सेवा के अधिकारी बन गए। अर्थात दस नंबर पाने वाले को 170 नंबर का फायदा पहुंचाया गया। मजेदार बात तो यह है कि अगर इस परीक्षा में सिर्फ आठ नंबर का फायदा दिया जाता तो कट ऑफ मार्क के हिसाब से कम से कम और बीस लोगों का चयन हो सकता था। इससे यह अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि अगर उम्मीदवारों को 170 नंबर का लाभ दिया जाता तो शायद द्वितीय सिविल सेवा की परीक्षा देने वाले 99 फीसदी लोग सफल हो जाते(दैनिक जागरण,रांची,2.7.2010)।
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