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20 जुलाई 2010

पढ़ाई के वैकल्पिक रास्ते : पत्रचार, दूरस्थ और ऑनलाइन

आप अगर रेगुलर कॉलेज में किसी कारण से प्रवेश लेने से वंचित रह गए हैं या पसंद का कोर्स नहीं मिला है तो आप के लिए और भी बहुत से वैकल्पिक रास्ते खुले हैं। पत्रचार, दूरस्थ शिक्षा के अलावा ऑनलाइन शिक्षा माध्यम से आप अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। इन माध्यमों से पढ़ाई करने का एक फायदा यह भी है कि आप पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी का अनुभव भी हासिल कर सकते हैं। यहां इन्हीं शिक्षा माध्यमों की जानकारी और उनमें अंतर को बताया जा रहा है, जो आपको सही निर्णय लेने में सहायक होगा।

आजादी के बाद शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए स्कूल और कॉलेज स्तर पर रेगुलर के अलावा पत्रचार माध्यम अपनाया गया। इस माध्यम में छात्रों को घर बैठे ही प्रिंटेड अध्ययन सामग्री मुहैया करा दी जाती है। इसके बाद सिर्फ परीक्षा देने की जरूरत होती है। पत्रचार माध्यम में हाजिरी और क्लास रूम में आने के झंझट से मुक्ति दे दी गई। बाद में पत्रचार माध्यम को विकसित और अपडेट करके विश्वविद्यालयों ने दूरस्थ शिक्षा का तंत्र विकसित किया। बदलाव की इस बयार में पत्रचार माध्यम दूरस्थ शिक्षा का एक अंग बन रह गया है।
दूरस्थ शिक्षा में अब पत्रचार के अलावा छात्रों को पर्सनल कॉन्टेक्ट क्लासेज और ऑनलाइन के रूप में भी अध्ययन की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। दूरस्थ शिक्षा के लिए 25 साल पहले इग्नू की स्थापना की गई। अब दूसरे विश्वविद्यालय भी इस राह पर चल पड़े हैं। पत्रचार माध्यम को अपडेट करते हुए उसे नया रूप देते हुए दूरस्थ शिक्षा का मॉडल अपनाया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण है दिल्ली विश्वविद्यालय का स्कूल ऑफ कोरसपोंडेंस। दस साल पहले संस्थान के नाम के अनुरूप इसे पत्रचार स्कूल के रूप में जाना जाता था, लेकिन 2002 के बाद इसका नाम बदल कर कैम्पस ऑफ ओपन लर्निग कर दिया और पत्रचार माध्यम इसका एक अंग बन कर रह गया, जिसे स्कूल ऑफ ओपन लर्निग के नाम से जाना जाता है। यह संस्थान इसके बाद धीरे-धीरे दूरस्थ शिक्षा के मॉडल को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ा। आज इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि इसमें रेगुलर से दोगुने यानी तीन लाख छात्र अध्ययनरत हैं।

पत्राचार माध्यम बोले तो
आजादी के बाद विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों में पत्रचार माध्यम ऐसी शिक्षा प्रणाली को नाम दिया गया, जिसमें दाखिला देकर छात्रों को घर बैठे ही प्रिंटेड अध्ययन सामग्री डाक से भेज दी जाती थी। उसे पढ़ कर सिर्फ परीक्षा देनी होती थी। डाक के जरिए ही दाखिला मिल जाता था। डाक के जरिए शिक्षा देने के कारण इसे पत्रचार का नाम दिया गया। स्कूल ऑफ कोरसपोंडेस के पूर्व ओएसडी प्रो. एसके विज कहते हैं, यह एक पुराना मॉडल है, जिसमें तकनीक के रूप में कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं होता था।

जब कंप्यूटर और इंटरनेट शिक्षण संस्थानों में आया और अध्ययन-अध्यापन में सहायक बना तो पत्रचार माध्यम को नया नाम दूरस्थ शिक्षा यानी डिस्टेंस एजुकेशन दिया गया। इसके तहत प्रिंटेंट अध्ययन सामग्री के अलावा कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से छात्रों को दाखिला, अध्ययन सामग्री और पर्सनल क्लासेज की सुविधा मुहैया कराई गई। अपने छात्रों के लिए शैक्षिक कार्यक्रमों का प्रसारण टीवी व इंटरनेट आदि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए किया गया। दोनों में तकनीक का फर्क है, अन्यथा पत्रचार दूरस्थ शिक्षा का ही अंग है।

दूरस्थ शिक्षा
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय देश-विदेश में दूरस्थ शिक्षा के एक बड़े केन्द्र के रूप में उभरा है। इसने कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से देशभर में डिस्टेंस एजुकेशन के मॉडल को लोकप्रिय बनाया। विश्वविद्यालय में मीडिया स्कूल के निदेशक प्रो. एसएन सिंह कहते हैं, यह शिक्षण का एक बड़ा माध्यम है, जिसमें प्रिंटेड सामग्री के अलावा ऑडियो-वीडियो का भी इस्तेमाल किया जाता है। घर बैठे छात्रों को टेलीकॉन्फ्रेंसिंग से भी शिक्षा दी जा रही है।

रेगुलर में सिर्फ एक बार क्लास होती है। इसके बाद छात्रों को खुद पढ़ना और समझना होता है। उस क्लास को दोबारा रिपीट नहीं किया जाता, लेकिन डिस्टेंस एजुकेशन में क्लास और अध्ययन सामग्री रिकॉर्डेड है, जिसे दोबारा सुना और समझा जा सकता है। यहां मार्ग-निर्देशक की कमी नहीं खलने दी जाती। शिक्षा और शिक्षार्थी के बीच निरंतर संवाद कायम रहता है। यह लॉन्ग लाइफ लर्निग प्रक्रिया है।

इग्नू यूजीसी और एआईसीटीई की तरह देशभर के डिस्टेंस एजुकेशन की एक नोडल एजेंसी बन गया है। इग्नू के समकुलपति प्रो. ओमप्रकाश मिश्र कहते हैं, डिस्टेंस एजुकेशन पत्रचार, क्लासेज और ऑनलाइन, दोनों को कवर करती है। जिन कोर्सेज में लैब का काम है, वहां क्लासेज भी कराई जाती हैं। इंफॉर्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी यानी आईसीटी के इस्तेमाल के कारण पत्रचार माध्यम दूरस्थ शिक्षा के रूप में तब्दील हो गया है।

ऑनलाइन शिक्षा
शिक्षा का यह माध्यम पूरी तरह कंप्यूटर और इंटरनेट पर आधारित है। इसमें छात्रों के लिए अध्ययन घर बैठे और पेपरलेस होता है। क्लासेज वचरुअल होती हैं। छात्र को घर बैठे कंप्यूटर पर ही दाखिला मिलता है। फीस भी कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन जमा करानी होती है। इसके बाद अध्ययन सामग्री भी ऑनलाइन दी जाती है। छात्रों को कोर्स पूरा करने के दौरान असाइनमेंट और परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन भरना होता है। ऑनलाइन परीक्षा देने के बाद सर्टिफिकेट भी ऑनलाइन ही प्रदान किया जाता है। इन सब कामों को करने के लिए अध्ययनरत छात्र को संस्थान एक पासवर्ड देता है। नई शताब्दी में शिक्षण संस्थान इस माध्यम की ओर से तेजी से बढ़ रहे हैं।

महत्त्वपूर्ण संस्थान ओपन विश्वविद्यालय
-दिल्ली विश्वविद्यालय, स्कूल ऑफ ओपन लर्निग
वेबसाइट : www.du.ac.in

-इंदिरागांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय
वेबसाइट : www.ignou.ac.in

-जामिया हमदर्द ओपन एंड डिस्टेंस लर्निग
वेबसाइट : www.jamiahamdard.edu

-यूपी राजश्री टंडन ओपन यूनिवर्सिटी
वेबसाइट : www.uprtouallahabad.org.in/

-नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, बिहार
वेबसाइट : www.nalandaopenuniversity.com

-कोटा ओपन यूनिवर्सिटी, राजस्थान

-उत्तरांचल ओपन यूनिवर्सिटी
वेबसाइट : www.uou.ac.in

-मध्यप्रदेश भोज ओपन यूनिवर्सिटी
वेबसाइट : www.bhojvirtualuniversity.com

अन्य संस्थान
-इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय
वेबसाइट : www.ipu.ac.in

-कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय
वेबसाइट : www.kukinfo.com

-अन्नामलाई यूनिवर्सिटी
वेबसाइट : www.annamalaiuniversitydde.in
-पांडिचेरी विश्वविद्यालय
वेबसाइट :www.pandiuni.edu.in

-पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी
वेबसाइट : www.ptu.ac.in


-अलगप्पा विश्वविद्यालय, तमिलनाडु
वेबसाइट : www.algappauniversity.nic.in

-महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक
वेबसाइट : www.mdurohatak.com

-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय
वेबसाइट : www.hpuniv.nic.in

-उस्मानिया यूनिवर्सिटी
वेबसाइट : www.osmania.ac.in

(आनंद कुमार,नई दिशाएं,हिंदुस्तान,दिल्ली,20.7.2010)

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