गरीबों को जल्द ही निजी कंपनियों में भी आरक्षण मिल सकता है। सरकार देश के गरीब तबके को निजी क्षेत्र में पांच फीसदी तक आरक्षण दिलाना चाहती है। उद्योग विभाग ने इस बारे में सीआईआई, फिक्की और एसोचैम को पत्र भेजकर उनकी राय मांगी है। सरकार और उद्योग संगठनों ने इस साल अप्रैल में इस मुद्दे पर बैठक की थी। 14 जुलाई को उद्योगों को जारी किया गया पत्र इसी बैठक का नतीजा है। उद्योग सचिव आरपी सिंह ने अप्रैल की बैठक में कहा था कि निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण देने के लिए दबाव दिया जाना संभव नहीं है। मगर जिन क्षेत्रों में उद्योगों को वित्तीय प्रोत्साहन मिल रहा है, वहां समाज के गरीब तबके को पांच फीसदी तक आरक्षण दिया जा सकता है। उद्योगों को सरकार की ओर से कई तरह के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं। इनमें निर्यात पर करों में छूट और विशेष क्षेत्रों में आयकर रियायतें आदि शामिल हैं। कंपनियों के शोध एवं विकास बजट में भी इस तरह की छूट मिलती है। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क में निर्यात आय पर भी आयकर छूट मिलती है। हालांकि सरकार निजी क्षेत्र में नौकरियों के आरक्षण पर जोर नहीं दे रही है। मगर सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र भी समाज के पिछड़े तबके के लिए सकारात्मक कदम उठाए। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारी की अगुवाई वाला एक उच्चस्तरीय समूह इस मुद्दे पर उद्योग के साथ विचार-विमर्श कर रहा है। वहीं उद्योग जगत का दावा है कि वह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति व समाज के अन्य पिछड़े वर्गो के लिए प्रशिक्षण और रोजगार की पहल कर चुका है। सीआईआई ने इस बारे में कई रिपोर्टे पेश की हैं, जिनसे पता चलता है कि उसके कई सदस्य संगठनों ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,19.7.2010)।
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