दिल्ली हाईकोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से विकलांगों के प्रति सहानुभूति रखने का निर्देश देते हुए आयोग के एक उम्मीदवार का आवेदन खारिज न करने के लिए कहा है, जो नेत्रहीन होने की वजह से अपना फार्म उचित तरीके से नहीं भर सका।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने फैसले में कहा है कि आयोग राहू वर्मा का आवेदन सिर्फ इस आधार पर खारिज न करें कि वह फार्म में चिन्हित स्थान पर अपनी तस्वीर लगाने में असफल रहा, क्योंकि वह 75 फीसदी नेत्रहीन है।
आयोग की ओर से एडवोकेट नरेश कौशिक ने कहा कि यूपीएससी बोर्ड से आवेदक की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्ण नजरिया अपनाने को कहेंगे। हाईकोर्ट आयोग द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसने एकल जज के फैसले को चुनौती दी है।
एकल जज ने फैसले में यूपीएससी द्वारा साल २क्१क् के लोक सेवा परीक्षा के लिए वर्मा का आवेदन फार्म ठुकराने के निर्णय को खारिज करते हुए उन्हें प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने की इजाजत दे दी थी। आयोग ने दलील दी है कि वर्मा ने अपनी तस्वीर आवेदन फार्म में बार कोड के ऊपर लगा दी थी, उनकी यह गलती स्वीकारणीय नहीं है।
आयोग की दलील से सहमत न होते हुए हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। एकल जज ने आयोग की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ७५ फीसदी नेत्रहीन होने की वजह से वह आवेदन फार्म में उचित स्थान पर अपनी तस्वीर लगाने में असफल रहे। इसमें कोई शक नहीं कि यह याचिकाकर्ता की ओर से की गई गलती है। लेकिन कोर्ट का यह मानना है कि विशेष कारणों के चलते उन्हें परीक्षा देने से रोका नहीं जा सकता है(दैनिक भास्कर,दिल्ली,5.7.2010)।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने फैसले में कहा है कि आयोग राहू वर्मा का आवेदन सिर्फ इस आधार पर खारिज न करें कि वह फार्म में चिन्हित स्थान पर अपनी तस्वीर लगाने में असफल रहा, क्योंकि वह 75 फीसदी नेत्रहीन है।
आयोग की ओर से एडवोकेट नरेश कौशिक ने कहा कि यूपीएससी बोर्ड से आवेदक की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्ण नजरिया अपनाने को कहेंगे। हाईकोर्ट आयोग द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसने एकल जज के फैसले को चुनौती दी है।
एकल जज ने फैसले में यूपीएससी द्वारा साल २क्१क् के लोक सेवा परीक्षा के लिए वर्मा का आवेदन फार्म ठुकराने के निर्णय को खारिज करते हुए उन्हें प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने की इजाजत दे दी थी। आयोग ने दलील दी है कि वर्मा ने अपनी तस्वीर आवेदन फार्म में बार कोड के ऊपर लगा दी थी, उनकी यह गलती स्वीकारणीय नहीं है।
आयोग की दलील से सहमत न होते हुए हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। एकल जज ने आयोग की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ७५ फीसदी नेत्रहीन होने की वजह से वह आवेदन फार्म में उचित स्थान पर अपनी तस्वीर लगाने में असफल रहे। इसमें कोई शक नहीं कि यह याचिकाकर्ता की ओर से की गई गलती है। लेकिन कोर्ट का यह मानना है कि विशेष कारणों के चलते उन्हें परीक्षा देने से रोका नहीं जा सकता है(दैनिक भास्कर,दिल्ली,5.7.2010)।
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