युवाओं को शुरू से ही रोजगारपरक शिक्षा देकर उन्हें स्वावलंबी बनाने की पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की व्यावसायिक शिक्षा की नीति पूर्वांचल में दम तोड़ रही है। कई विद्यालयों में कुछ ट्रेड बंद भी कर दिए गए। इसके पीछे कारण छात्रों की अरुचि बताई जा रही है। लेकिन, हकीकत है कि विद्यालय प्रशासन की ही रुचि नहीं है इस पाठ्यक्रम में। ऐसा तब है जब पिछले एक दशक में इसी पाठ्यक्रम से जुड़े छात्रा-छात्राओं ने प्रदेश की मेरिट में नाम दर्ज कराकर पूर्वांचल की लाज रखी।
बनारस में १८ विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है। इसमें यूपी कालेज, वीकेएम, दुर्गाचरण जैसे कुछ विद्यालयों में तो ठीक-ठाक पढ़ाई हो रही है। लेकिन, राजकीय विद्यालयों में स्थिति ठीक नहीं है। उदाहरण स्वरूप राजकीय क्वींस कालेज में संचालित चार ट्रेडों में बुनाई तकनीक और रंगीन फोटोग्राफी तो दो वर्ष पूर्व ही बंद हो गए। इस सत्र से बुनियादी स्वास्थ्य कार्मिक और रेडियो टेलीविजन ट्रेड भी बंद हो जाएगा। प्रधानाचार्य नरेंद्र देव का कहना है इन ट्रेड्स में दाखिले के लिए कोई आया ही नहीं। लेकिन, सूत्र बताते हैं कि आवेदन फार्म ही उपलब्ध नहीं हो सके छात्रों को। जीजीआईसी रामनगर की प्रधानाचार्य कल्पना श्रीवास्तव का मानना है कि शिक्षकों की स्थायी व्यवस्था न होने से योजना सफल नहीं हो सकी।
उधर, गाजीपुर के २० विद्यालयों में से दिलदारनगर इंटर कालेज में तो यह पाठ्यक्रम पूरी तरह से बंद है। डीआईओएस की दलील है कि शिक्षक नहीं होने के चलते कोर्स बंद किया गया। अन्य स्कूलों में भी अंतिम सांस ले रही है योजना। यही हाल जौनपुर के १६ कालेजाें का है। कहीं शिक्षकों की कमी है, तो कुछ में शिक्षक रहते हुए भी लापरवाही बरती जा रही है। रजिस्टर पर तो छात्र हैं पर वे रोजाना स्कूल नहीं जाते। मिर्जापुर के १६, सोनभद्र के पांच, मऊ के आठ, बलिया के १२ और चंदौली के दो दर्जन विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। लेकिन, ज्यादातर जगहों पर स्थिति ठीक नहीं है।
व्यावसायिक शिक्षा के लाभ
संबंधित ट्रेड से पढ़ाई पूरा करने के बाद सीधे पालीटेक्निक में उसी ट्रेड के द्वितीय वर्ष में मिल जाता है दाखिला
स्वरोजगार के लिए दो लाख तक मिलता है अनुदान
रोजगार खोलने के लिए मिलती हैं सरकार की ओर से अन्य कई सुविधाएं
कोर्स बंद होने की वजह
संसाधनों की कमी, भवन की अनुपलब्धता
नियमित और प्रशिक्षित योग्य शिक्षकों का अभाव
शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता तय नहीं हुई
साल में एक साथ एक बार मानदेय देना
(अमर उजाला,वाराणसी,1.7.2010)
बनारस में १८ विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है। इसमें यूपी कालेज, वीकेएम, दुर्गाचरण जैसे कुछ विद्यालयों में तो ठीक-ठाक पढ़ाई हो रही है। लेकिन, राजकीय विद्यालयों में स्थिति ठीक नहीं है। उदाहरण स्वरूप राजकीय क्वींस कालेज में संचालित चार ट्रेडों में बुनाई तकनीक और रंगीन फोटोग्राफी तो दो वर्ष पूर्व ही बंद हो गए। इस सत्र से बुनियादी स्वास्थ्य कार्मिक और रेडियो टेलीविजन ट्रेड भी बंद हो जाएगा। प्रधानाचार्य नरेंद्र देव का कहना है इन ट्रेड्स में दाखिले के लिए कोई आया ही नहीं। लेकिन, सूत्र बताते हैं कि आवेदन फार्म ही उपलब्ध नहीं हो सके छात्रों को। जीजीआईसी रामनगर की प्रधानाचार्य कल्पना श्रीवास्तव का मानना है कि शिक्षकों की स्थायी व्यवस्था न होने से योजना सफल नहीं हो सकी।
उधर, गाजीपुर के २० विद्यालयों में से दिलदारनगर इंटर कालेज में तो यह पाठ्यक्रम पूरी तरह से बंद है। डीआईओएस की दलील है कि शिक्षक नहीं होने के चलते कोर्स बंद किया गया। अन्य स्कूलों में भी अंतिम सांस ले रही है योजना। यही हाल जौनपुर के १६ कालेजाें का है। कहीं शिक्षकों की कमी है, तो कुछ में शिक्षक रहते हुए भी लापरवाही बरती जा रही है। रजिस्टर पर तो छात्र हैं पर वे रोजाना स्कूल नहीं जाते। मिर्जापुर के १६, सोनभद्र के पांच, मऊ के आठ, बलिया के १२ और चंदौली के दो दर्जन विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। लेकिन, ज्यादातर जगहों पर स्थिति ठीक नहीं है।
व्यावसायिक शिक्षा के लाभ
संबंधित ट्रेड से पढ़ाई पूरा करने के बाद सीधे पालीटेक्निक में उसी ट्रेड के द्वितीय वर्ष में मिल जाता है दाखिला
स्वरोजगार के लिए दो लाख तक मिलता है अनुदान
रोजगार खोलने के लिए मिलती हैं सरकार की ओर से अन्य कई सुविधाएं
कोर्स बंद होने की वजह
संसाधनों की कमी, भवन की अनुपलब्धता
नियमित और प्रशिक्षित योग्य शिक्षकों का अभाव
शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता तय नहीं हुई
साल में एक साथ एक बार मानदेय देना
(अमर उजाला,वाराणसी,1.7.2010)
सुन्दर लेखन।
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