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01 जुलाई 2010

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को धता बता रहे हैं अधिकतर कालेज

पंजाब में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से संबद्ध अधिकतर कालेज यूनिवर्सिटी को धता बता रहे हैं। इन कालेजों में यूनिवर्सिटी द्वारा बीएससी में लाइफ साइंस के नए सब्जेक्ट कंबीनेशन लागू करने केबजाए पुराने सब्जेक्ट कंबीनेशन से ही काम चलाया जा रहा है।

यही नहीं, कई कालेजों में पुराने और नए दोनों सब्जेक्ट कंबीनेशन के साथ बच्चे पढ़ाए जा रहे हैं। इसी वर्ष मार्च में सब्जेक्ट कंबीनेशन ठीक किया गया है। बावजूद इसके कालेजों का ध्यान इस ओर नहीं है।

दस साल पहले आए थे नए सब्जेक्ट

लगभग दस वर्ष पहले बीएससी लाइफ साइंस में एक के बाद एक सात नए सब्जेक्ट जोड़े गए थे। इनमें बायोटेक्नोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, माइक्रोबाइलॉजी, जेनेटिक्स, एन्वायर्नमेंटल साइंस, इंडस्ट्रियल माइक्रोबाइलॉजी, इंडस्ट्रीयल कैमिस्ट्री आदि शामिल हैं।

यहां हुई दिक्कत

लाइफ साइंस की वोकेशनल सब्जेक्ट स्ट्रीम के तहत बीएससी में नए सब्जेक्ट्स का कैमेस्ट्री, जुलॉजी और बॉटनी के साथ कई कंबीनेशन बनाए गए थे। इसमें लाइफ साइंस के मुख्य आधार जुलॉजी और बॉटनी में किसी एक की पढ़ाई की जाने लगी। वहीं लाइफ साइंस के नेशनल एबीलिटी टेस्ट तथा प्रोफेसर के लिए दोनों सब्जेक्ट की पढ़ाई जरूरी हैं। एक विषय की पढ़ाई करने की वजह से लाइफ साइंस के बच्चे उच्चशिक्षा में पिछड़ गए।

पुरानी राह पर कालेज

मार्च 2010 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कौंसिल द्वारा नए सब्जेक्ट कंबीनेशन जारी करने के बाद सभी संबद्ध कालेजों में इससे संबंधित पत्र भेजा गया। इसके बावजूद प्रदेश के अधिकतर कालेजों ने अपने प्रॉस्पेक्टस में नए सब्जेक्ट कंबीनेशन को जगह न देते हुए पुराने कंबीनेशन को ही चलाया। जबकि कुछ कालेजों में पुराने और नए दोनों कंबीनेशन दर्शाए गए।

पानीपत के अलावा अन्य जिलों में है दिक्कत

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी द्वारा बीएससी के नए सब्जेक्ट कंबीनेशन को पानीपत के सभी कालेजों ने अपना लिया है। जबकि प्रदेश के अन्य जिलों के ज्यादातर कॉलेजों ने इसे अभी तक जगह नहीं दी है। इनमें यमुनानगर और हिसार के चार, करनाल के तीन, अंबाला कैंट और जींद के दो, पंचकूला, अंबाला शहर और सिरसा का एक एक कॉलेज शामिल हैं। यही नहीं, कुरुक्षेत्र के यूनिवर्सिटी कालेज में भी नए सब्जेक्ट कंबीनेशन लागू नहीं किए गए।

2008 में उठाई आवाज

लाइफ साइंस में गलत सब्जेक्ट कंबीनेशन के कारण बच्चों पर पड़ रहे असर की वजह से 2008 में लाइफ साइंस फैकल्टी के प्रोफेसरों ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को इस बारे में अवगत कराया। जिस पर वाइस चांसलर ने 11 लोगों की कमेटी बनाई। इसमें डीन एकेडमी ऑफ साइंस, चेयरपर्सन ऑफ कैमिस्ट्री, डीन ऑफ लाइफ साइंस, साइंस विभागाध्यक्ष तथा दो कालेजों के प्रोफेसरों को शामिल किया गया।

इस कमेटी ने लगभग 10 बार मीटिंग करने के बाद सब्जेक्ट कंबीनेशन सही करते हुए जुलॉजी और बॉटनी को एक साथ रखते हुए इनके साथ वोकेशनल सब्जेक्ट जोड़ा, जिसे 18 मार्च 2010 को एकेडमी कौंसिल ने पास कर दिया।

यह मामला जानकारी में नहीं था। इस संबंध में जांच की जाएगी। नए सब्जेक्ट कंबीनेशन ही लागू किए जाएंगे।
डॉ. डीडीएस संधू, वाइस चांसलर, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी(दैनिक भास्कर,पानीपत,29.6.2010)

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