पंजाब यूनिवर्सिटी के जिन टीचरों को हिंदी और पंजाबी नहीं आती, उन्हें इन विषयों के लिए 10वीं की परीक्षा पास करनी होगी। इसके लिए दो साल का वक्त दिया गया है। हिंदी और पंजाबी न आने से ये टीचर इन भाषाओं में पेपर देने वालों के पेपर नहीं चेक कर पाते थे। इससे रिजल्ट निकलने में देरी होती थी। यूनिवर्सिटी सिंडिकेट ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन पिछले लंबे अरसे से समय पर रिजल्ट नहीं घोषित कर पा रहा। पिछले दिनों विभागाध्यक्षों की वीसी प्रो. आरसी सोबती के साथ हुई मीटिंग में इस समस्या को उठाया गया। वीसी ने टीचरों से आग्रह किया था कि चेकिंग का काम समय पर पूरा करें। जून के शुरू में हुई एकेडेमिक काउंसिल की मीटिंग में भी यह मसला छाया रहा था। हालांकि समस्या की वजह यह नहीं कि पीयू में टीचरों की कमी है, बल्कि यह है कि कई टीचर हिंदी और पंजाबी पढ़ नहीं सकते। सो इन भाषाओं में पेपर देने वाले स्टूडेंट्स के पेपर देर से चेक होते हैं और रिजल्ट में देरी होती है।
पीयू प्रशासन ने इस समस्या को दूर करने के लिए ऐसे टीचरों के लिए पंजाबी और हिन्दी का ज्ञान लाजिमी कर दिया है। इसके लिए ऐसे टीचरों को इन दोनों भाषाओं में दसवीं की परीक्षा पास करनी होगी। परीक्षा पास करने के लिए इन्हें दो साल दिए गए हैं।
पुटा ने यूजीसी गाइडलाइंस पर विरोध जताया
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा टीचरों की प्रोमोशन के लिए जारी नई गाइडलाइंस पर विरोध जताया है। पुटा जनरल सेक्रेटरी प्रो. अक्षय कुमार का कहना है कि यूजीसी की नई गाइडलाइंस से टीचर पसोपेश में पड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले यूनिवर्सिटी में करिअर एडवांसमेंट स्कीम (कैस) के तहत 2008 में जारी गाइडलाइंस के हिसाब से प्रोमोशन हुए।
अब कहा जा रहा है कि प्रोमोशन के लिए नई गाइडलाइंस को आधार बनाया जाना चाहिए। इस वजह से टीचरों में कनफ्यूजन की स्थिति पैदा हो रही है। पुटा ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से इस संबंध में यूजीसी के सामने अपना पक्ष रखने की अपील की है(अधीर रोहाल,दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,1.7.2010)।
यूनिवर्सिटी प्रशासन पिछले लंबे अरसे से समय पर रिजल्ट नहीं घोषित कर पा रहा। पिछले दिनों विभागाध्यक्षों की वीसी प्रो. आरसी सोबती के साथ हुई मीटिंग में इस समस्या को उठाया गया। वीसी ने टीचरों से आग्रह किया था कि चेकिंग का काम समय पर पूरा करें। जून के शुरू में हुई एकेडेमिक काउंसिल की मीटिंग में भी यह मसला छाया रहा था। हालांकि समस्या की वजह यह नहीं कि पीयू में टीचरों की कमी है, बल्कि यह है कि कई टीचर हिंदी और पंजाबी पढ़ नहीं सकते। सो इन भाषाओं में पेपर देने वाले स्टूडेंट्स के पेपर देर से चेक होते हैं और रिजल्ट में देरी होती है।
पीयू प्रशासन ने इस समस्या को दूर करने के लिए ऐसे टीचरों के लिए पंजाबी और हिन्दी का ज्ञान लाजिमी कर दिया है। इसके लिए ऐसे टीचरों को इन दोनों भाषाओं में दसवीं की परीक्षा पास करनी होगी। परीक्षा पास करने के लिए इन्हें दो साल दिए गए हैं।
पुटा ने यूजीसी गाइडलाइंस पर विरोध जताया
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा टीचरों की प्रोमोशन के लिए जारी नई गाइडलाइंस पर विरोध जताया है। पुटा जनरल सेक्रेटरी प्रो. अक्षय कुमार का कहना है कि यूजीसी की नई गाइडलाइंस से टीचर पसोपेश में पड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले यूनिवर्सिटी में करिअर एडवांसमेंट स्कीम (कैस) के तहत 2008 में जारी गाइडलाइंस के हिसाब से प्रोमोशन हुए।
अब कहा जा रहा है कि प्रोमोशन के लिए नई गाइडलाइंस को आधार बनाया जाना चाहिए। इस वजह से टीचरों में कनफ्यूजन की स्थिति पैदा हो रही है। पुटा ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से इस संबंध में यूजीसी के सामने अपना पक्ष रखने की अपील की है(अधीर रोहाल,दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,1.7.2010)।
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