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20 जुलाई 2010

आईटी-बीएचयू का ओहदा बढ़ाने की तैयारी

उच्च शिक्षा में शोध की कमी से जूझ रही सरकार की नजर उन चुनिंदा उच्च तकनीकी संस्थानों और विश्वविद्यालयों पर है, जिनसे बेहतर नतीजों की ज्यादा संभावनाएं हैं। लिहाजा उन संस्थानों का ओहदा बढ़ाया जा सकता है। सब कुछ ठीक रहा तो इस लिहाज से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का तकनीकी संस्थान (आईटी-बीएचयू) देश के राष्ट्रीय महत्व के चुनिंदा संस्थानों में शुमार होगा। सोमवार को उच्च शिक्षा पर राउंड टेबुल बैठक में भी उच्च शिक्षा में शोध बढ़ाने पर जोर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक भविष्य की चुनौतियों और जरूरतों को देखते हुए सरकार राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की संख्या बढ़ाने की सोच रही है। इस संबंध में केंद्रीय ही नहीं, राज्यों के उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी संस्थानों और बेहतर नतीजे देने वाले विश्वविद्यालयों पर भी उसकी नजर है। बताते हैं कि आगामी 24 जुलाई को प्रस्तावित राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक में भी इस एजेंडे को शामिल किया गया है। उसमें भी आईटी-बीएचयू और बंगाल इंजीनियरिंग एंड साइंस यूनिवर्सिटी शिवपुर (पश्चिम बंगाल) जैसे उच्च मापदंड स्थापित करने वाले संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में शामिल करने की पैरवी की गई है। साथ ही राज्यों में बेहतर नतीजे दे रहे उच्च शिक्षण संस्थानों को अकादमिक व बुनियादी ढांचे के रूप में समृद्ध करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता देने पर जोर दिया है। उधर, मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की मौजूदगी में सोमवार को उच्च शिक्षा पर राउंड टेबुल की बैठक में भी उच्च शिक्षा में शोध बढ़ाने पर जोर दिया गया। उसके लिए आईआईटी चेन्नई की ओर से बनाए गए चेन्नई टेक्नोलॉजी पार्क का मॉडल अख्तियार करने पर जोर दिया गया। चेन्नई टेक्नोलॉजी पार्क में निजी क्षेत्र को भी शोध का मौका दिया गया है। बैठक में इसी तरह के और टेक्नोलॉजी पार्क बनाने की पैरवी की गयी। इस क्षेत्र में काम करने के साथ ही पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के कारण फिलहाल ऐसा पार्क बनाने का जिम्मा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) को दिया गया है। बैठक में मौजूद सीएसआईआर के महानिदेशक को उसके लिए कार्ययोजना बनाकर देने को कहा गया है। सिब्बल ने कहा कि वे कुलपतियों को भी इसकी सलाह देंगे, क्योंकि कई विश्वविद्यालयों के पास उसके लिए पर्याप्त जमीन है। इसके अलावा उच्च शिक्षा में शिक्षकों को आकर्षित करने की कार्ययोजना के लिए एक कमेटी भी बनाई गई है। कमेटी में मानव संसाधन विकास मंत्री के सलाहकार सुनील माहेश्वरी, सीएसआईआर के महानिदेशक समीर ब्रह्मचारी समेत तीन लोग रखे गए हैं। कमेटी विश्वविद्यालयों को और स्वायत्तता देने को मूल में रखकर अपनी रिपोर्ट देगी। बैठक में शोध के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य करने वालों के लिए नेशनल कोर बनाने और रोमिंग प्रोफेसर की अवधारणा पर भी अमल की बात की गई(राजकेश्वर सिंह,दैनिक जागरण,दिल्ली,20.7.2010)।

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