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02 जुलाई 2010

महज दो साल की पढ़ाई कर बनेंगे कानूनी पेशेवर

कानून का ककहरा जाने बिना ही महज चंद रुपयों के लिए वकीलों के साथ कानूनी लिखा-पढ़ी में हाथ बंटाने या फिर सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठानों में कानूनी दस्तावेजों की जिम्मेदारी संभालने वाले अब पूरी तरह न सही, लेकिन काम भर को कानून के जानकार बन सकेंगे। सरकार एक ऐसा कदम उठाने की सोच रही है, जिसमें सिर्फ दो साल की पढ़ाई से कानूनी पेशेवर बनने के अवसर खुल सकेंगे। देश में प्रस्तावित 14 इनोवेटिव (अभिनव) विश्वविद्यालयों में से एक सिर्फ कानून की पढ़ाई के लिए ही खोला जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को कानूनी शिक्षा पर गठित राउंड टेबुल की बैठक में वकील बनने के लिए विधि स्नातक (एलएलबी) की पढ़ाई के अलावा बाकी कानूनी कामकाज करने वालों के लिए अलग से दो साल का एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी है। मसलन वकीलों के मुंशियों की नौकरी करने वालों, सरकारी, गैर सरकारी दफ्तरों में कानूनी मामलों को देखने वालों (पैरा लीगल स्टाफ) के लिए यह नया अवसर होगा। इसे बी.ए.ऑनर्स इन लॉ जैसा नाम दिया जा सकता है। तर्क यह है कि इससे वकीलों की मदद करने वालों व अन्य कानूनी कामकाज देखने वालों के लिए भी अच्छी नौकरी का मौका मिलेगा। साथ ही शुरू में दो साल की इस पढ़ाई को कर लेने वालों को बाद में एलएलबी की पढ़ाई करने में कुछ छूट दी जा सकती है। इसके अलावा प्रस्तावित 14 इनोवेटिव विश्वविद्यालयों में से एक को सिर्फ कानून की पढ़ाई के लिए ही समर्पित करने पर भी सहमति बनी है। उसका जोर शोध पर होगा, जबकि वहां से पोस्ट ग्रेजुएट स्तर की डिग्री दी जायेगी। यह इनोवेटिव विश्वविद्यालय सार्वजनिक व निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर होगा। इसमें 50 प्रतिशत सरकार की हिस्सेदारी होगी जबकि निजी क्षेत्र से गैर-सरकारी संस्थाएं (एनजीओ) या उस तरह के दूसरे संस्थान साझेदारी कर सकेंगे। उसके एवज में उन्हें विश्वविद्यालय में अपनी एक पीठ (चेयर) स्थापित करने की छूट होगी। कानून में उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए अलग से पाठ्यक्रम तैयार कराने पर भी बात हुई है। उसमें कानून के प्रतिष्ठित संस्थानों में शोध करने वालों की भी मदद ली जायेगी। इस सबके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को अलग से कमेटी गठित करने को कहा गया है(दैनिक जागरण,लखनऊ,2.7.2010)।

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