वर्ष 2011 में मैट्रिक की परीक्षा नये पैटर्न पर होगी। प्रश्नों का पैटर्न बदला होगा। परीक्षा अगले साल फरवरी में होगी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अब पूरक परीक्षा की प्रणाली समाप्त करने वाली है। लेकिन राज्य में फिलहाल सीबीएसई जैसी ग्रेडिंग प्रणाली लागू नहीं होगी। समिति के अध्यक्ष प्रो.ए.के.पी. यादव ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मैट्रिक की परीक्षा के नये पैटर्न में विज्ञान की परीक्षा में थ्योरी पेपर 80 अंकों का होगा। 20 अंकों के आब्जेक्टिव प्रश्न होंगे। विज्ञान में 20 अंकों की प्रायोगिक परीक्षा ली जायेगी। पूर्व में थ्योरी 85 अंक एवं प्रायोगिक परीक्षा 15 अंक की ली जाती थी। भूगोल में अब प्रोजेक्ट आधारित प्रश्न पूछे जायेंगे। श्री यादव ने बताया कि सीबीएसई परीक्षा प्रणाली लागू होने पर पूरक परीक्षा की पद्धति भी समाप्त हो जायेगी। अब सीबीएसई के सामान दो पेपर में फेल करने वाले छात्र ही कपार्टमेंटल परीक्षा दे सकेंगे। ज्यादा विषयों में फेल होने वाले को अब पुन: परीक्षा देनी होगी। दसवीं की परीक्षा के प्रश्नों के चयन के लिए आगामी 16,17 एवं 18 अगस्त को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सभागार में एक कार्यशाला आयोजित की जायेगी। इसमें एनसीईआरटी से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे। कार्यशाला के बाद इस वर्ष सितम्बर तक दसवीं की परीक्षा के लिए सैम्पुल पेपर तैयार कर लिये जायेंगे। बोर्ड ने पहली बार सैम्पुल प्रश्नों के साथ उत्तर भी देने का निर्णय लिया है। प्रश्न पत्रों के सेट में मार्कि ग के तरीके भी दर्शाये जायेंगे। श्री यादव ने बताया कि फिलहाल दसवीं की परीक्षा में ग्रेडिंग प्रणाली लागू करना संभव नहीं है। राज्य की शैक्षिक स्थिति को देखते हुए माध्यमिक वार्षिक परीक्षा समाप्त नहीं की जा सकती है। शिक्षकों एवं छात्रों के अनुपात को देखते हुए राज्य में सीसीई (कंटीनिवस कम्प्रेहेसिंव इवैल्यूएशन) लागू नहीं किया जा सकता। सूबे में सीसीई लागू करने के लिए प्रति चालीस छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए। उसी अनुपात में विद्यालयों में कमरे होने चाहिए, जो फिलहाल संभव नहीं है(दैनिक जागरण,पटना,10.8.2010)।
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