स्टॉल व अन्य कार्यो के ठेकों में गडबडी के बाद रेलवे बोर्ड ने इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) के हाथ क्या काटे, देशभर में 3000 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी पर संकट खडा हो गया है। आधे कर्मचारी स्थायी रूप से रेलवे के कर्मचारी है और बाकी ठेके पर काम कर रहे हैं। रेलवे ने अभी तक आईआरसीटीसी से कार्य हाथ में नहीं लिए हैं, इसलिए कर्मचारी चुपचाप बैठे हैं। लेकिन इसी माह अधिकतर के बेरोजगार होने की बात आशंका है।
रेलवे बोर्ड ने स्टेशन पर लगे स्टॉलों के ठेके से लेकर ट्रेन के अन्दर संचालित पैन्ट्रीकार तक का काम अपने हाथ में ले दिया है। आईआरसीटीसी के पास केवल जन आहार और पर्यटन व्यवस्था छोडी है। आदेश के बाद आईआरसीटीसी में कार्यरत अधिकतर कर्मचारियों को अभी से नौकरी की चिंता सता रही है।
सूत्रों के अनुसार रेलवे अपने कर्मचारियों को तो वापस खपा लेगा, लेकिन अभी तक तय नहीं हो सका कि किसे कहां लगाया जाएगा। उथर आईआरसीटीसी में ठेके पर लगे सभी कर्मचारियों को कभी भी एक साथ काम छोडने के आदेश मिल सकते हैं। अपने कर्मचारियों को बचाने के लिए अधिकारी भी रेलवे से बात कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं निकला। उत्तर-पश्चिम रेलवे में भी 50 से अधिक कर्मचारी ऎसे हैं, जिनको नौकरी की चिंता सता रही है। हालाकि अभी वह अपना पुराना काम सम्भाल रहे हैं। अपने यहां 25 कर्मचारी स्थायी हैं और बाकी ठेके पर काम कर रहे हैं।
कल का भरोसा नहीं
रेलवे ने वैसे तो अभी कोई आदेश नहीं निकाला कि आईआरसीटीसी से काम कब वापस लेने हैं। जो कर्मचारी पहले जैसा काम कर रहे थे, वैसे ही आज कर रहे हैं। लेकिन कल का भरोसा नहीं है।
रोहिताश्व, क्षेत्रीय प्रबंधक, आईआरसीटीसी, जयपुर(राजस्थान पत्रिका,जयपुर,24.8.2010)
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