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10 अगस्त 2010

राजस्थान में इंजीनियरिंग की 44 फीसदी सीटें रहेंगी खाली

राजस्थान में इंजीनियरिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भले ही राज्य सरकार प्रतिवर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों की वृद्धि व नए कॉलेज खोलने की स्वीकृति दे रही है, लेकिन विद्यार्थियों का इंजीनियरिंग के प्रति रुझान नहीं बन पा रहा है। इस वर्ष राजस्थान प्री-इंजीनियरिंग टेस्ट (आरपीईटी) की वरीयता सूची में शामिल विद्यार्थियों में से 40 फीसदी से भी कम ने ऑप्शन फार्म भरे। इसके चलते प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में करीब 44 प्रतिशत यानी 21 हजार सीटें खाली रह जाएंगी।


प्राविधिक शिक्षा मंडल की ओर से आरपीईटी-2010 के तहत ऑप्शन फार्म भरने की शनिवार को अंतिम तिथि थी। वरीयता सूची में शामिल 71 हजार 400 अभ्यर्थियों को ऑप्शन भरने का मौका दिया गया था। मंडल के अध्यक्ष एसके सिंह ने बताया कि अगले एक पखवाड़े में वरीयता के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। इसके तहत प्रदेश के 124 इंजीनियरिंग कॉलेजों की 48 हजार 87 सीटों पर प्रवेश दिया जाना है, लेकिन ऑप्शन फार्म करीब 27 हजार विद्यार्थियों ने ही भरे हैं।


हालांकि इस बार गत वर्ष की तुलना में करीब 16 हजार सीटें बढ़ गई हैं, लेकिन ऑप्शन भरने वाले विद्यार्थियों की संख्या गत वर्ष के समान ही रही है। गौरतलब है कि गत वर्ष आरपीईटी के तहत काफी सीटें खाली रह गई थी। गत वर्ष करीब 62 हजार विद्यार्थियों ने यह परीक्षा दी थी और सीटों की संख्या केवल 32 हजार थी, जबकि ऑप्शन फार्म केवल 27 हजार विद्यार्थियों ने ही भरे थे।


इस वर्ष परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या तो लगभग 10 हजार बढ़ी लेकिन ऑप्शन भरने वाले विद्यार्थियों की संख्या नहीं बढ़ सकी(दैनिक भास्कर,जोधपुर,10.8.2010)।

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