केन्द्र सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव के आरोप में 44 डीम्ड विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के तहत उसे डीम्ड विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द करने की शक्ति प्राप्त है। न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और दीपक वर्मा की सदस्यता वाली पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि यूजीसी अधिनियम के तहत आयोग को विश्वविद्यालयों को डीम्ड का दर्जा देने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने पीठ से कहा कि डीम्ड दर्जा प्रदान करने की शक्ति में ही मानकों पर खरा नहीं उतर पाने पर उनकी मान्यता रद्द करने की भी शक्ति निहित है। बाद में, वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने केन्द्र के 44 डीम्ड विश्वविद्यालयों को अवैध करार देकर उनकी मान्यता रद्द कर दिए जाने के प्रस्ताव का इस आधार पर विरोध किया कि ऐसी शक्तियां सिर्फ यूजीसी को प्राप्त हैं। उन्होंने पी एन टंडन समिति के दिशानिर्देशों पर सवाल खड़ा किया जिसमें विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द कर देने की अनुशंसा की गई थी। इस मुद्दे पर जिरह आज भी जारी रहेगी(हिंदुस्तान,दिल्ली,3.8.2010)।
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04 अगस्त 2010
डीम्ड विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द कर सकती है सरकार
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