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03 अगस्त 2010

राजस्थानी को मान्यता की लड़ाई दिल्ली में होगी

"हम लोग आरक्षण नहीं बल्कि राजस्थानी भाषा की मान्यता मांग रहे हैं और इस हक को हासिल करने के लिए हमें दिल्ली में लड़ाई लड़नी होगी। बिना केन्द्र पर दबाव बनाए हम अपनी मायड़ भाषा के लिए मान्यता प्राप्त नहीं कर सकते। इसलिए हमें आंदोलन की शुरुआत जल्दी करनी होगी।"

राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका (राना) के मीडिया चेयरमैन प्रेम भंडारी ने यह बात सोमवार को आयोजित ‘राजस्थानी अर मायड़ भाषा’ गोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि हम लोग सरकार पर दबाव नहीं बना पाए। हालांकि राज्य सरकार और विपक्ष ने अपनी बात दिल्ली तक भेज दी है, लेकिन दिल्ली में बैठी सरकार पर दबाव बनाने के लिए जन आंदोलन चलाना होगा। उन्होंने कहा कि वे इस आंदोलन का खर्चा भी वहन करने को तैयार हैं लेकिन इसकी पीड़ा रखने वाले लोगों को आगे आना होगा।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. कल्याणसिंह शेखावत ने कहा कि भाषा बिना संस्कृति का अस्तित्व नहीं है। जो व्यक्ति भाषा का मान नहीं रख सकता, वह घृणा योग्य व्यक्ति है। उन्होंने 31 अगस्त से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए आंदोलन की अलख जगाने की चेतावनी दी। समारोह में महेन्द्रसिंह नगर ने कहा कि हमारी भाषा को संविधान में मान्यता नहीं मिली। इस पर राजनेताओं को विचार करना चाहिए। अधिवक्ता महेन्द्र लोढ़ा ने कहा कि सामूहिक प्रयास से हम राजस्थानी की मान्यता हासिल कर सकते हैं।

माणक पत्रिका के प्रधान संपादक पदम मेहता ने कहा कि मायड़ भाषा को मान्यता तभी मिलेगी, जब हम इस आंदोलन को बड़ा करेंगे। इस मौके पर प्रेम भंडारी का शॉल ओढ़ा, स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया। समारोह में भंडारी ने राजस्थानी साहित्य का प्रकाशन करवाने के लिए एक लाख रुपए देने की घोषणा की। डॉ. सुमन बिस्सा ने राजस्थानी में गीत पढ़ा(दैनिक भास्कर,जोधपुर,3.8.2010)।

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