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03 अगस्त 2010

मदरसों को आधुनिक स्वरूप देना होगा : पाशा

अखिल भारतीय मुस्लिम युवा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हफीजुर्रहमान पाशा ने कहा है कि मदरसों को आधुनिक रूप देना समय की मांग है। इससे मुसलमानों की भावी पीढ़ी को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। उन्हें हुनरमंद बनाकर रोजगार के अवसर भी दिलाए जा सकेंगे। जोधपुर में दारूल उलूम इस्हाकिया की ओर से आयोजित प्रोग्राम में भाग लेने आए पाशा ने भास्कर से खास बातचीत में कहा कि मदरसों को परंपरागत कार्यो के साथ ही एज्यूकेशन के मामले में खुद को अपडेट करना होगा।

कंप्यूटर शिक्षा के साथ ही अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाने की व्यवस्था करनी होगी। इंडियन हिस्ट्री पढ़ाने से भावी पीढ़ी अपने माजी के बारे में जान सकेगी। नई तकनीक अपनाने से मुस्लिम युवाओं को बड़ी कंपनियों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। मदरसों से निकले बच्चे विश्वविद्यालयों तक पहुंच सकेंगे। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लैंग्वेज के सेंटर ऑफ परशियन के कन्वीनर पाशा का मानना है कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों को राह पर लाने में अमेरिका सबसे बड़ा रोड़ा है।

अमेरिका जानता है कि भारत सुपर पॉवर बनने की ओर अग्रसर है, इसलिए वह बाज तरीकों से दोनों देशों के बीच कड़वाहट जारी रहने देता है। दोनों ही देशों के हुक्मरानों को इस बात तो समझना होगा।पाशा ने हाल ही फ्लोरिडा के चर्च की ओर से की गई घोषणा की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी धर्म के ग्रंथ का सम्मान होना चाहिए। व्यक्ति विशेष की बुराइयों को धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

मुस्लिम युवाओं की तरक्की आज की बुनियादी जरूरत है। मंच इस दिशा में काम कर रहा है। पाशा ने सूफी संगीत, सूफी संतों, इंडियन, अरबी और परशियन लिटरेटर पर भी चर्चा की। इस मौके पर मारवाड़ एज्यूकेशन एवं वेलफेयर सोसाइटी के सीईओ मोहम्मद अतीक, सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे(दैनिक भास्कर,जोधपुर,3.8.2010)।

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