उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र में पांच विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए सोमवार को विधानसभा में पांच विधेयक प्रस्तुत किये गए। यह विधेयक लखनऊ में प्रस्तावित बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, नोएडा में नोएडा इंटरनेशनल विश्वविद्यालय, मुरादाबाद में आईएफटीएम विश्वविद्यालय, गजरौला (ज्योतिबा फुले नगर) में वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय, गाजियाबाद में मोनाड विश्वविद्यालय की स्थापना से सम्बंधित हैं। विधेयकों में दिये गए प्रावधानों के मुताबिक निजी विश्वविद्यालयों को अपनी फीस व अन्य प्रभार तथा प्रवेश के लिए मानक निर्धारित करने की छूट होगी। विधेयकों में निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए ट्रस्ट/प्रायोजक के पास न्यूनतम 50 एकड़ सटी हुई भूमि का स्वामित्व होना चाहिए। जमीन पर कम से कम 24,000 वर्ग मीटर कार्पेट एरिया में भवन निर्माण होना चाहिए जिसमें से न्यूनतम 50 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल शैक्षिक व प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए होगा। इस भवन में कार्यालय व प्रयोगशालाओं में न्यूनतम पांच करोड़ रुपये मूल्य के उपकरण व यंत्र होने चाहिए। ट्रस्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार कम से कम सात विषयों में शिक्षण और/अथवा अनुसंधान के लिए विभाग/विद्यालय के अध्यापकों की नियुक्ति और अवस्थापना सुविधाएं विकसित करेगा। सभी शर्तें पूरी करने के दस्तावेज और शपथपत्र प्राप्त करने के बाद ही राज्य सरकार ट्रस्ट को विश्वविद्यालय के संचालन की शुरुआत करने के लिए प्राधिकार पत्र जारी करेगी। विश्वविद्यालय का प्रधान कुलाधिपति होगा जिसे ट्रस्ट तीन वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त करेगा। कुलाधिपति विश्वविद्यालय की अंतरिम कार्यपरिषद का गठन करेगा। वह ट्रस्ट को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है। कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति करेंगे। कुलपति विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यपालक और शैक्षणिक अधिकारी होगा(दैनिक जागरण,लखनऊ,10.8.2010)।
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