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08 अगस्त 2010

छत्तीसगढ़ः दुपहियाचालक स्कूली बच्चों के आगे सब बेबस

दुपहिया से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों की हिस्ट्री तैयार करने का पुलिसिया फामरूला फेल होता दिख रहा है। महीने भर पहले निर्देश देने के बावजूद एक भी स्कूल के प्रबंधन ने छात्र-छात्राओं का ऐसा रिकार्ड नहीं बनाया है। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को दोबारा बैठक बुलाकर प्राचार्यो से विद्यार्थियों की सूची मांगी।

बैठक में पहुंचे प्राचार्यों ने यह कहकर छुट्टी पा ली कि बच्चे हमारी सुन ही नहीं रहे हैं। पुलिस ने प्राचार्यों से मदद मांगने के लिए शनिवार को बैठक बुलायी थी, जबकि वहां उसका उल्टा हो गया। प्राचार्यो ने यहां तक कह दिया कि पुलिस ही कार्रवाई करें। हमने कई बार नोटिस जारी कर दी।

प्रत्येक कक्षाओं के क्लास टीचर के माध्यम से सूचना भेजी गई कि मोटरसाइकिल या मोपेड से आने वाले बच्चे अपने ड्राइविंग लाइसेंस के बारे में जानकारी दें। वे कौन-कौन सी गाड़ियों में आ रहे हैं, इसका भी ब्यौरा मांगा गया। प्राचार्यो ने बताया कि कई मर्तबा याद दिलाने के बावजूद विद्यार्थी नहीं सुन रहे हैं।

ऐसी दशा में चालानी कार्रवाई की सख्ती करने पर ही यह संभव हो सकेगा। प्राचार्यो की बातें सुनकर पुलिस अधिकारी हैरान रह गए। अंत में अफसरों ने प्राचार्यों से कहा कि वे अंतिम चेतावनी के रूप में विद्यार्थियों के नाम पर नोटिस जारी करें। उसके बाद सख्ती की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि दुपहिया से आने वाले प्रत्येक बच्चें की रास्ते में जांच होगी। बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने वाले विद्यार्थियों से तगड़ा जुर्माना वसूली किया जाएगा। बैठक में अफसरों ने प्राचार्यो से कहा कि पुलिस बच्चों की सुरक्षा को ध्यान मंे रखकर सब कुछ कर रही है। इसमें आप लोगों की मदद चाहिए।

पर प्राचार्यों ने अपनी दिक्कत गिनाकर छुट्टी पा ली। बैठक में पुलिस अधिकारियों के साथ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। 100 मीटर की दूरी पर पानी ठेले बैन : पुलिस ने स्कूल की बाउंड्रीवाल से 100 मीटर की परिधि में पान-गुटखा की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।

सिटी एसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने प्राचार्यो को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने प्राचार्यों से कहा कि जिनकी स्कूल के करीब पान-गुटखा के ठेले चल रहे हैं, वे हमें सूचना दें। पुलिस बिक्री पर पाबंदी लगाने के लिए पहल करेगी।

बेपरवाह प्राइवेट स्कूल
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए बुलायी गई बैठक में बड़े निजी स्कूल के प्रतिनिधि गैर हाजिर थे। ज्यादातर शासकीय और अर्ध शासकीय स्कूल के प्राचार्य ही उपस्थित थे। अफसरों को यह देखकर निराशा हुई।, क्योंकि ज्यादातर प्राइवेट स्कूल के बच्चे ही निजी वाहनों से स्कूल आते-जाते हैं(दैनिक भास्कर,रायपुर,8.8.2010)।

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