उपराष्ट्रपति डा. हामिद अंसारी ने कहा है कि आईआईटी के छात्र शोध कार्यो में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। छात्रों में सिर्फ 15 फीसदी ही शोध कार्य करते हैं या फिर वह शिक्षक के तौर पर काम करना चाहते हैं। यह चिंता का विषय है। छात्रों में इस प्रवृत्ति को बदलना होगा क्योंकि, बगैर शोध के नई खोज नहीं हो सकती। वे आईआईटी में शनिवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अनिवार्य व सस्ती शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी जरूरत यह है कि शिक्षा आम व्यक्ति की पहुंच में हो। यह तभी संभव होगा जब शिक्षा सस्ती होगी। उन्होंने कहा कि देश में कई अच्छे संस्थान हैं पर अभी तक कोई भी शिक्षण संस्थान यहां तक कि आईआईटी भी विश्व के पहले 100 संस्थानों में नहीं आता। उपराष्ट्रपति ने प्रसिद्ध नाभिकीय वैज्ञानिक अनिल काकोदकर को डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि से सम्मानित किया। दीक्षांत समारोह में 1371 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं। आईआईटी के रजिस्ट्रार डा. राकेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष 138 छात्रों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई। स्नातक स्तर पर 465, पीजी स्तर पर 660 व एमबीए स्तर पर 108 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। ज्ञात है कि इसी वर्ष 16 अगस्त को आईआईटी का शक्षिक तौर पर 50 वर्ष पूरा होने जा रहा है (दैनिक जागरण,दिल्ली,8.8.2010)।
शोध वही कर सकता है जिसके रगों में ईमानदारी का खून दौर रहा है आज इन संस्थाओं में ज्यादातर बच्चे वही आतें हैं जिनके माता-पिता पूरी तरह भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगा कर नहा रहे होते हैं ,सच्चाई,ईमानदारी पर चलकर आज कोई भी अपने बच्चों को पढ़ा ही नहीं सकता ,शर्मनाक है इस देश की शिक्षा व्यवस्था ,ज्यादातर भडुए और कुकर्मियों द्वारा संचालित की जा रही है इस देश के शिक्षण संस्थान | शिक्षा पर सरकार और शिक्षा मंत्री का नहीं बल्कि शिक्षा माफिया का कब्ज़ा है ...?
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