सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप के बदले सेवा शुल्क लेने के मामले में बैकफुट पर आने के साथ ही सरकार अपनी गलती आगे भी सुधारेगी। लिहाजा इंटर्नशिप करने वाले एमबीबीएस, पैरामेडिकल डिग्री और डिप्लोमाधारकों को अब सेवा के बदले मेवा देने की तैयारी है। तकरीबन दो माह पहले शासनादेश जारी कर प्राइवेट मेडिकल कालेजों, पैरामेडिकल शिक्षण संस्थानों के डिग्री व डिप्लोमाधारकों से सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप करने की एवज में सेवा शुल्क का प्रावधान रखा गया था। हालांकि बीते जून माह से पहले यह प्रावधान नहीं था। इसके मुताबिक डिग्री व डिप्लोमाधारकों से प्रतिमाह क्रमश: पांच हजार व तीन हजार रुपये प्रतिमाह शुल्क लेने की व्यवस्था की गई। उल्टी गंगा बहाने की तर्ज पर किए गए इस फैसले पर आपत्ति के बाद स्वास्थ्य महकमे को यह व्यवस्था वापस लेने को मजबूर होना पड़ा है। सरकार ने बाकायदा आदेश जारी कर इंटर्नशिप के लिए सेवा शुल्क लेने का आदेश निरस्त कर दिया। यही नहीं, इस खामी को आगे भी दुरुस्त किया जाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इंटर्नशिप के दौरान अस्पतालों में चिकित्सकीय या उपचार संबंधी सेवा देने की एवज में प्रशिक्षुओं को मेहनताना दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में यह व्यवस्था लागू है। उत्तराखंड में यह व्यवस्था बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर मेहनताना तय होगा। इससे सूबे के सैकड़ों विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश शासनादेश की तर्ज पर ही यहां भी बंदोबस्त करने की तैयारी है। शासन के निर्देश पर महकमे ने इस दिशा में काम शुरू किया है(दैनिक जागरण,देहरादून,25.8.2010)।
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