वेतनमान से अधिक वेतन उठाने का आरोप झेल रहे पटना विश्वविद्यालय के 174 शिक्षकों को राहत मिल गयी है। पटना उच्च न्यायालय द्वारा इन शिक्षकों के वेतन में कटौती करने पर रोक लगा दिया गया है। न्यायालय के आदेश पर विवि द्वारा शिक्षकों के वेतन में कटौती नहीं करने की अधिसूचना जारी कर दी गयी है। इससे शिक्षक मासिक दो से ढ़ाई हजार रुपये का नुकसान उठाने से बच गये। विवि में छठा वेतनमान लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। मानव संसाधन विकास विभाग ने पटना विवि के 174 शिक्षकों को गलत वेतनमान निर्धारित करा अधिक वेतन उठाने के रूप में चिह्नित किया था। विभाग का कहना था कि शिक्षक 14940 रुपये का स्केल ले रहे हैं, जो स्वीकृत वेतनमान से अधिक है। विभाग ने विवि को शिक्षकों से वेतनमान से अधिक भुगतान राशि की वसूली करने का आदेश दिया। विभाग के आदेश के खिलाफ कई शिक्षक उच्च न्यायालय में चले गये। न्यायालय ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बावजूद विवि की तरफ से अधिसूचना जारी नहीं की गयी जिसके कारण वेतन में कटौती कर भुगतान का अंदेशा बना था। शिक्षक न्यायालय के आदेश का हवाला देकर विवि पर लगातार अधिसूचना जारी करने का दबाव बनाये हुए थे। मंगलवार को वेतन कटौती नहीं करने की अधिसूचना जारी होने पर शिक्षकों ने राहत की सांस ली। पटना विवि शिक्षक संघ (पूटा) के सचिव डा. रणधीर कुमार सिंह ने न्यायालय के फैसले पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि विभाग शिक्षकों को बेवजह परेशान एवं अपमानित करने की प्रवृति से बाज आये। इससे उच्च शिक्षा का भला नहीं होने वाला नहीं है(दैनिक जागरण,पटना,25.8.2010)।
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