मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

24 अगस्त 2010

झारखंडःरिटायरमेंट की उम्र बढ़ी तो शिक्षा का बंटाधार

विश्वविद्यालय के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की उम्र 65 साल करने से शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. यूजीसी मापदंडों के आधार पर वेतनमान निर्धारित करने पर कई िशक्षकों को शर्मिदगी का सामना करना पड़ेगा.

आइएएस अधिकारी देवाशीष गुप्ता की अध्यक्षतावाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने के मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद यह टिप्पणी की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यूजीसी द्वारा सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने की अनुशंसा का मूल उद्देश्य ‘असाधारण ज्ञान’ रखनेवाले शिक्षकों को टीचिंग के क्षेत्र में बनाये रख कर शिक्षा का स्तर बढ़ाना है.

झारखंड में इस अनुशंसा को लागू करने से शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि इसका लाभ ऐसे शिक्षकों को भी मिल जायेगा, जो यूजीसी मापदंडों को पूरा नहीं करते. सेवानिवृत्ति उम्र सीमा बढ़ाने से रिक्तियां कम होंगी और अच्छे शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में आने का मौका कम मिलेगा. यानी बेहतर ज्ञान और डिग्रीवाले लोग इधर-उधर घूमते रहेंगे.

यहां ऐसे शिक्षकों को विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर और एसोसिएट प्रोफ़ेसर के बराबर वेतन मिल रहा है, जो प्लस टू (11वीं और 12वीं) के छात्रों को पढ़ा रहे हैं. हालांकि वे यूजीसी के निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करते. यह न तो यूजीसी, न भारत सरकार के नियमों के अनुकूल है. इसलिए सरकार को शिक्षा के क्षेत्र का री-स्ट्रक्चरिंग करना चाहिए.

प्लस टू और उच्च शिक्षा को अलग-अलग करना चाहिए. हां, यह बात अलग है कि यूजीसी किसी शिक्षक को ज्यादा पैसा देने से रोकता नहीं है. इसलिए अगर सरकार की अंतरात्मा ऐसे शिक्षकों को ज्यादा पैसा देना चाहती है, जो उसके योग्य नहीं हैं, तो समिति को इसमें कुछ नहीं कहना. राज्य के विश्वविद्यालय में शिक्षकों की संख्या को सही साबित करने के लिए गलत आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है.

रांची विश्वविद्यालय की रिपोर्ट से पता चलता है कि लोहरदगा के बलदेव साहु कॉलेज में प्लस टू स्तर के 6249 और ग्रेजुएट स्तर के 8082 छात्र हैं. दूसरी तरफ़ इंटर काउंसिल की रिपोर्ट से पता चलता है कि यहां 2010 में 12वीं के लिए सिर्फ़ 2117 छात्र ही सेंटअप हुए.

दूसरी बात यह कि विश्वविद्यालय द्वारा बतायी गयी छात्रों की संख्या के हिसाब से इतने छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रति क्लास रूम 100 छात्र के हिसाब से 140 क्लास रूम की जरूरत होगी. पर, सिर्फ़ 13 क्लास रूम ही हैं. ऐसे में शिक्षा के स्तर को भी आसानी से समझा जा सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि छठे वेतन आयोग का गठन भारत सरकार के कर्मचारियों के लिए किया गया था, शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों के लिए नहीं. केंद्र में छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के बाद अन्य क्षेत्रों में जैसे बैंक, रेल ओद में भी इसे लागू करने की मांग उठी. भारत सरकार ने इसे अपने नियंत्रणवाले शैक्षणिक संस्थानों में लागू किया.

यूजीसी ने भी शिक्षा के क्षेत्र में सुधार ओद के उद्देश्य से शिक्षण क्षेत्र के लिए निर्धारित शर्तो व मापदंडों के साथ इसे लागू करने पर विचार करने की अनुशंसा की. इसलिए यूजीसी की अनुशंसाओं के आलोक में यूजीसी वेतनमान उन्हीं शिक्षकों को मिलना चाहिए जो यूजीसी की शतरें को पूरा करते हों(शकील अख्तर, प्रभात खबर,24.8.2010).

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।