कुछ विवादों की वजह से डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर साइंस विभाग में एमसीए की रिक्त सीटें द्वितीय चरण की काउंसिलिंग के बाद भी नहीं भरी जा सकीं। बताया गया है कि जो आरक्षित सीटें खाली हैं उन पर ऐसे पात्र विद्यार्थियों ने भी दावेदारी जताई है, जिन्होंने बीसीए उत्तीर्ण की है लेकिन हायर सेकंडरी गणित विषय से उत्तीर्ण नहीं की है।
ऐसे विद्यार्थियों को विवि एवं उससे संबद्ध कॉलेजों में पूर्व में बीसीए में एडमिशन दिया गया था। लेकिन अब इन विद्यार्थियों को एमसीए में एडमिशन दिया जाए या नहीं? इस बारे में न तो विवि प्रशासन और न ही कम्प्यूटर साइंस विभाग की ओर से कोई सूचना जारी की गई है।
गौरतलब है कि अब विवि प्रशासन द्वारा सत्र 2010-11 में एमसीए में एडमिशन के लिए निर्धारित योग्यता बीसीए एवं बीसीए में एडमिशन के लिए गणित विषय से हायर सेकंडरी परीक्षा पास होना अनिवार्य किया गया है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जिन्होंने हायर सेकंडरी में गणित विषय नहीं लिया है और बीसीए उत्तीर्ण की है, उन्हें एमसीए में एडमिशन दिया या नहीं?
हालांकि विभागाध्यक्ष प्रो. आरएस कसाना का कहना है कि एमसीए में निर्धारित योग्यता पूरी करने वालों को एडमिशन दिए गए हैं और रिक्त सीटों पर भी नियमानुसार एडमिशन दिए जाएंगे। प्रो. कसाना ने बताया कि रिक्त सीटों के लिए तीसरे चरण की काउंसिलिंग आयोजित की जाएगी, जो संभवत: 20 अगस्त के बाद होगी।
प्रो. कसाना ने बताया कि एमसीए की लगभग पांच-छह सीट खाली हैं। कुलपति प्रो. एनएस गजभिए लगभग एक सप्ताह से बाहर हैं। बताया जाता है कि एमसीए में रिक्त सीटों पर एडमिशन के लिए जो विद्यार्थी दावेदारी जता रहे हैं, इसको लेकर नीतिगत निर्णय लेने की जरूरत है। इस संबंध में एडमिशन सेल और कम्प्यूटर साइंस विभाग के अधिकारी जोखिम लेना नहीं चाहते। शायद यही कारण है कि दूसरे चरण की काउंसिलिंग के लगभग दो सप्ताह बाद भी एमसीए की रिक्त सीटें नहीं भरी जा सकी हैं(दैनिक भास्कर,सागर,8.8.2010)।
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