देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों में शामिल डीयू का विदेशों में भी बहुत क्रेज है। यही वजह है कि प्रति वर्ष दो से ढाई हजार विदेशी छात्र यहां विभिन्न कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। उनको यहां उनके मनपसंद कोर्स के साथ ही अच्छा माहौल मिलता है, लेकि न विदेशियों के लिए डीयू कैं पस में रहना मुश्किलों भरा साबित होता है। उनके सामने खाने और रहने की सबसे बड़ी समस्या आती है। उसके पीछे एक मुख्य वजह यह भी है कि विदेशी छात्रों का कोई भी संगठन यहां कार्यर त नहीं था, लेकि न अब इन छात्रों का एक संगठन बन गया है जो इनके लिए सांस्कृ तिक गतिविधियों के साथ आपस में इनको जोड़ने का काम करेगा। छात्रों की जरूरतों को देखते हुए कुछ विदेशी छात्रों से मिलकर पिछले वर्ष कैं पस में अनोपौचरिक रूप से संगठन बनाया है। संगठन के सचिव अफ गानिस्तान के थर्ड ईयर छात्र इलियास नूर ने बताया कि जिसे आधिकारिक रूप से कार्य करने में एक माह से अधिक समय लग जाएगा। पिछले पांच वर्षों से डीयू में विदेशी छात्रों की संख्या में तीस से चालीस प्रतिशत का इजाफा हुआ है।यहां उनको क ई तरह की भाषा, रहना और संस्कृ ति आदि को लेकर कई परेशानियों का सामना क रना पड़ता है। जिसके मद्दे नजर विदेशी छात्र पिछले तीस वर्षों से संगठन बनाने का प्रयास कर रहे थे, लेकि न डीयू प्रशासन ने फ रवरी 2008 में विदेशी छात्रों की यूनियन पर सहमति जताई थी। जिस पर कु लपति की अब मोह र लग गई है और यह डूसू का ही एक हिस्सा होगा(हिंदुस्तान,दिल्ली,4.8.2010)।
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