दो वर्षों में प्राइमरी विद्यालयों में आई नौकरी की बहार के चलते बीएड डिग्री में एकाएक आया बूम अब ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। सत्र २०१०-११ की काउंसलिंग के नतीजे संकेत दे रहे हैं कि लोगों में बीएड का खुमार उतरने लगा है। काउंसलिंग बढ़ने के साथ अभ्यर्थियों का प्रतिशत घट रहा है। यही हालात रहे तो पहले चरण की काउंसलिंग के बाद बीएड की ३५-४० फीसदी सीटें खाली रह जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष २००७-०८ में प्राइमरी स्कूलों में मेरिट के आधार पर व्यापक भर्तियां शुरू हुईं। इससे बीएड करके बैठे हजारों लोगों के लिए एकाएक नौकरियों के रास्ते खुल गए। छठे वेतन आयोग के बाद प्राइमरी स्कूलों की आकर्षक तनख्वाह ने युवाओं में इसकी दिलचस्पी बढ़ाई और इसके साथ विशिष्ट बीटीसी में भर्ती के लिए बीएड की पढ़ाई हॉट फेवरेट बन गई। तीन वर्षों में लगातार बीएड के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। यही नहीं बीएड कॉलेजों की तो बाढ़ सी आ गई है।
सत्र २०१०-११ में ही प्रदेश में बीएड के १४५ कॉलेज खुले हैं। दाखिले की मार को देखते हुए इन कॉलेजों ने छात्रों से मोटी फीस भी वसूली। पिछले चार सत्रों में शासन द्वारा निर्धारित बीएड फीस भी लगभग दोगुनी हो गई है। शासन के तमाम नियमों व उठाए कदमों का सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों ने हल निकाल लिया और छात्रों से मनचाहा वसूला। हालांकि सत्र २०१०-११ में बीएड काउंसलिंग में छात्रों की उपस्थिति के आंकड़े इनके माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा रहे हैं। ६ दिन की बीएड काउंसलिंग में बुलाए गए अभ्यर्थियों के लगभग ६५ फीसदी ही उपस्थित हुए हैं। च्वॉइस लॉक करने वालों में भी कितने प्रवेश लेंगे, यह कहना मुश्किल है। खास बात यह है कि एडेड कॉलेजों की सीटें फुल होने के बाद जबसे सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में च्वॉइस लॉकिंग शुरू हुई है तबसे अभ्यर्थियों की संख्या तेजी से घटी है। काउंसलिंग के पहले दिन लगभग २८ फीसदी अभ्यर्थी अनुपस्थित थे, जबकि छठे दिन यह आंकड़ा ३८ फीसदी से अधिक हो गया। यह हालात तब हैं जब शासन द्वारा सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के शुल्क तय करने से लेकर काउंसलिंग सेंटर पर फीस जमा कराने जैसे तमाम इंतजाम किए हैं। काउंसलिंग से जुड़े लोगों का मानना है कि विशिष्ट बीटीसी की भर्ती बंद होने का बीएड पर व्यापक असर पड़ा है, दूसरे शासन की तमाम कोशिशों के बावजूद भी अभ्यर्थी बीएड कॉलेजों में अपने आर्थिक शोषण रुकने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं(अमरउजाला,लखनऊ,9.8.2010)।
फीस पर तो लगाम जरुरी है.
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