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06 सितंबर 2010

नए यूलिप नियमों से 20% घट सकते हैं बीमा कर्मचारी

बीमा नियमों में हुए हालिया बदलाव के चलते जीवन बीमा कंपनियों को हजारों एजेंसी मैनेजरों को विदा करना पड़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक यूलिप के नए नियमों के लागू होने से बीमा प्रोफेशनल्स की संख्या में 20 फीसदी तक की कमी आ सकती है। यूलिप की नई नियमों के हिसाब से बीमा कंपनियों को मामूली मार्जिन पर काम करना पड़ सकता है।

बीमा कंपनियों के लागत में कमी करने का फैसला इरडा के साथ 20 जुलाई की बैठक के बाद लिया गया। बैठक में बाजार नियामक ने कंपनियों को नए नियमों का पालन करने के लिए ज्यादा वक्त देने से इनकार कर दिया। बैठक में मौजूद अधिकारियों के मुताबिक इरडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संभवत: यह कहा है कि 'हर पार्टी कभी न कभी खत्म होती है आपकी भी खत्म हो गई है।'

निजी जीवन बीमा उद्योग के साथ इस समय 30 लाख बीमा एजेंट जुड़े हुए हैं। दिसंबर 2009 के अंत तक निजी जीवन बीमा कंपनियों में 1,52,874 कर्मचारी थे। इन कर्मचारियों में से तीन चौथाई सेल्स से जुड़े हैं। बीमा कंपनियों का अनुमान है कि नए नियमों के लागू होने के बाद उद्योग से 10 लाख एजेंट निकल जाएंगे। इसी अनुपात में एजेंसी मैनेजरों की संख्या में कमी आएगी।

एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ खासतौर पर सेल्स विभाग में बड़ी छंटनी करने वाली है। एक सवाल के जवाब में कंपनी ने कहा, 'इरडा ने यूलिप के नए नियमों का पालन करने के लिए एक सितंबर की अंतिम समय सीमा तय की है। हम फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका प्रोडक्ट रेंज, कॉस्ट स्ट्रक्चर और इनसेंटिव/कमीशन पर क्या असर होगा। हमने कर्मचारियों की संख्या में कमी करने के बारे में कोई फैसला नहीं किया है। कंपनी के रूप में हम कमतर या खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों पर नजर रखते रहेंगे। यह नियमित प्रक्रिया है और बाजार की स्थिति कैसी भी हो, हम ऐसा करते रहते हैं।'

मेटलाइफ इंडिया के प्रबंध निदेशक राजेश रेलन कहते हैं, 'इरडा के हालिया सर्कुलर से हमारे कारोबार में बढ़ोतरी तो नहीं होगी इसके तरीके में बुनियादी बदलाव जरूर होगा। अगले 6 से 10 महीने में बीमा उद्योग में प्रोफेशनल की संख्या में 20 फीसदी की कमी आ सकती है।' रेलन के मुताबिक, इससे ग्राहकों को पक्का फायदा होगा लेकिन उनको तय रिटर्न मुहैया कराने के लिए बीमा कंपनियों को अपने कामकाजी लागत में काफी कमी करनी पड़ेगी।

रेलन के मुताबिक, 'बीमा कंपनियों को कारोबार फैलाने के लिए निवेश सहित हर तरह के खर्च में कमी करनी होगी। प्रोडक्ट सेल्स के मौजूदा ढांचे को बनाए रखने के लिए इसकी दिशा में बदलाव लाना होगा। इससे कमीशन में बहुत ज्यादा कमी आ सकती है और बहुत से छोटे एजेंटों का कारोबार बंद हो सकता है। यूलिप के नए नियम फाइनेंशियल इनक्लूजन के मिजाज के उलट हैं क्योंकि ये बीमा कंपनियों को कम कीमत के यूलिप बेचने से रोकते हैं।'(मयूर शेट्टी,इकनॉमिक टाइम्स,मुंबई,2.8.2010)

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