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07 सितंबर 2010

गरीब बच्चों को मुफ्त नहीं पढ़ाया तो बंद होंगे निजी स्कूल

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने यह स्पष्ट किया है कि निजी स्कूलों में गरीब छात्रों के लिए 25 प्रतिशत कोटा अनिवार्य होगा और इसका उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान भी होगा।

कपिल सिब्बल ने कहा कि हम मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 के तहत किए गए इस प्रावधान से एक इंच भी नहीं हटेंगे और इसे सख्ती से लागू करवाएंगे। पत्रकारों से बात करते हुए सिब्बल ने कहा कि हम अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में मुफ्त शिक्षा का रास्ता साफ करेंगे।

गौरतलब है कि सरकार ने इस साल एक अप्रैल 2010 को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून लागू किया है जिसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इस कानून के तहत ही निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करने का भी प्रावधान है।

हालांकि कई निजी स्कूलों ने इस आरक्षण का विरोध किया है लेकिन एक बार इस कानून में संशोधन संसद ने पास कर दिया तो अगले तीन सालों में इस आरक्षण को लागू करना स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा।

सिब्बल ने इस बारे में कहा कि यदि निजी स्कूल इस प्रावधान का उल्लंघन करेंगे तो उन्हें चलने नहीं दिया जाएगा। बिना निजी स्कूलों के सहयोग के देश में शिक्षा के स्तर को बढ़ाना और बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना मुमकिन नहीं हो पाएगा।

सिब्बल ने बताया कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए बने राष्ट्रीय आयोग को इस बाबत नजर रखने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे और वो सुनिश्चित करेगा की इस कानून का सख्ती से पालन हो रहा है।

सिब्बल ने कहा कि सभी निजी स्कूलों को मान्यता के लिए आवेदन देना होगा जिसके न करने पर स्कूलों पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि स्कूल फिर भी मान्यता नहीं लेता है तो उसपर प्रत्येक दिन के लिए दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यहीं नहीं आयोग इस कानून का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए एक टोल फ्री हेल्पलाइन सेवा भी शुरु करेगा ताकि कानून को न मानने वाले स्कूलों की जानकारी मिल सके(दैनिक भास्कर,बंगलौर,7.9.2010)।

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