पश्चिमी देशों में मांग की स्थिरता होने के कारण चीन और भारत जैसे अन्य विकसित देशों पर विस्तार का दबाव लगातार बढ़ने लगा है। एक सर्वे के मुताबिक, कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अगले पांच साल के दौरान इन देशों में कर्मचारियों की अतिरिक्त फौज बनाने की तैयारी में जुट गई हैं। बिजनेस-टू-बिजनेस क्षेत्र की कंपनी इकोनॉमिक इंटेलीजेंस के सर्वे के मुताबिक, १० से ४ कंपनियां (३९ फीसदी) आने वाले पांच सालों में प्रवासी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही हैं। ज्यादातर कंपनियां प्रवासी कर्मचारियों को सबसे ज्यादा चीन, भारत और अन्य एशियाई देशों में भेजने की योजना बना रही हैं। इसी तरह भारतीय कंपनियां जिनका परिचालन विदेशों में है वे भी अपने कर्मचारियों को बाहर भेज की तैयारी में जुटी हैं। इसके बाद मध्य-पूर्व, रूस, पूर्वी यूरोप संयुक्त रूप से कंपनियों की अगली पसंद हैं। सर्वे में पता चला है कि कर्मचारी भी इस वैविश्क और दूसरी जगहों पर काम करने के प्रति उत्सुक हैं। सर्वे में मुताबिक, कर्मचारियों को विश्वास है कि विकसित बाजारों में काम करने से उनके कॅरिअर को नई राह मिलेगी, साथ ही, उनका जॉब प्रोफाइल भी मजबूत होगा। इस सर्वे से एक बात और सामने आई है कि कंपनियों को, जिनका परिचालन विदेशों में है, वहां के प्रति अपने दृष्टिकोण की समीक्षा करने पर मजबूर किया है।
इसके अलावा कंपनियों को यह भी पता चलेगा कि उन्हें अपने मानव संसाधन और प्रॉपर्टी का प्रबंधन कैसे करना है। सर्वे में कहा गया कि वैश्विक मांग, गतिशील प्रवृत्ति और लचीले कर्मचारियों की जरूरत लगातार बढ़ रही है(नई दुनिया,दिल्ली,27.9.2010)।
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