जनसंख्या और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि से भारतीय कपड़ा एवं परिधान उद्योग में आगामी दस वर्षों में लगभग चार गुणा बढ़ोतरी होने की संभावना विशेषज्ञों द्वारा जताई जा रही है। फिलहाल ३२७ हजार करोड़ के कारोबार वाले इस व्यवसाय के २०२० में छलांग लगाकर १०३२ हजार करोड़ के स्तर को पार करने के पूरे-पूरे आसार हैं। इसमें वस्त्र एवं परिधान उद्योग का वर्तमान हिस्सा १५४ हजार करोड़ है जो २०१० तक ४७० हजार करोड़ के आंकड़े के पास पहुंच सकता है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कपास उत्पादक देश होने के कारण भारतीय कपड़ा उद्योग का नाम शीर्ष देशों के समूह में शुमार किया जाता है। हालांकि हाल के वर्षों तक इसमें असंगठित उद्योग का बोलबाला था लेकिन अब बड़ी कंपनियों के आने और सरकारी नीतियों में बदलाव से स्थितियों में परिवर्तन देखा जा सकता है। ऐसे में इस उद्योग एवं कारोबार क्षेत्र में उपलब्ध कॅरिअर अवसरों को नजरअंदाज करना कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता है। बुनकर और हथकरघा पर आधारित छवि वाले इस उद्योग में अब आमूल-चूल बदलाव प्रत्येक दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल क्वालिटी इंप्रूवमेंट, पॉलीमर इंजीनियरिंग, पॉलीमेरिक बायो मैटेरियल इंजीनियरिंग, डाइंग एंड प्रिंटिंग, टेक्सटाइल कैमिकल टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल एक्सपोर्ट मैनेजमेंट कंप्यूटर एडेड टेक्सटाइल डिजाइनिंग इत्यादि क्षेत्रों में इस उद्योग में बड़ी संख्या में प्रोफेशनल कार्यरत है और जैसा कि बताया गया है निरंतर ऐसे पदों में वृद्धि हो रही है। इस उद्योग को सुविधा की दृष्टि से कई उपवर्गों में विभाजित कर रोजगार सृजन की संभावनाओं पर नजर डाली जा सकती है। इनमें कॉटन टेक्सटाइल, सिल्क टेक्सटाइल, वूलन टेक्सटाइल, रेडिमेड गारमेंट, हैंड क्राफ्टेड टेक्सटाइल तथा जूट एंड कॉयर के अलावा कृत्रिम रेशों से तैयार किए जाने वाला कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग का खासतौर से उल्लेख किया जा सकता है। कारोबार और रोजगार सृजन की दृष्टि से प्रत्येक क्षेत्र का महत्व किसी भी दृष्टि से कम नहीं आंका जा सकता है। विश्व बाजार में भारतीय कपड़ा एवं सिले-सिलाए वस्त्रों की हिस्सेदारी वर्तमान में ४.५ प्रतिशत है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का दावा है कि आगामी दस वर्षों में भारत की हिस्सेदारी ८ प्रतिशत हो जाएगी। हालांकि इस सकारात्मक बदलाव के पीछे के विभिन्न कारणों में से एक विकसित देशों द्वारा तीसरी दुनिया के मुल्कों में अपनाई जा रही आउटसोर्सिंग की नीति भी कही जा सकती है। सस्ते कच्चे माल और उपलब्ध प्रचुर श्रम के कारण इन विकासशील देशों में मैन्युफैक्चर करना विदेशी कंपनियों के लिए कहीं अधिक मुनाफे का सौदा होता है।
टेक्सटाइल उद्योग के तकनीकी पक्ष में ट्रेंड प्रोफेशनलों से लेकर विभिन्न फैशन डिजाइनरों तक के लिए यह क्षेत्र तमाम तरह के रोजगार के अवसर प्रदान करता है। देश में नामी कॉर्पोरेट घरानों और ब्रांडेंड गारमेंट कंपनियों के बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में प्रवेश से इन प्रोफेशनलों को आकर्षक वेतन पर ज्यादा रोजगार ऑफर हो रहे हैं। इनके अलावा टेक्सटाइल एवं रेडिमेड गारमेंट के क्षेत्र में मैनेजमेंट मार्केटिंग एवं एक्सपोर्ट विभाग में अधिक संख्या लोगों की नियुक्तियां हो रही हैं। वस्त्र उत्पादन से लेकर रिटेलिंग सरीखे कार्यकलापों में कारोबार विशिष्टता के अनुसार अनुभव और ट्रेनिंग की दरकार अब महसूस की जाने लगी है। इस आवश्यकता का नतीजा है बड़ी संख्या में टेक्सटाइल उद्योग की जरूरत के अनुसार ट्रेनिंग प्रोग्रामों की सरकारी एवं निजी क्षेत्र के संस्थानों में शुरुआत। तकनीकी कोर्सेज में बीटेक (टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी), डिप्लोमा इन मैनमेड टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन मैनमेड टेक्सटाइल कैमिस्ट्री, पीजी डिप्लोमा इन टेक्सटाइल, कैमिकल प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन टेक्सटाइल कैमिकल टेक्नोलॉजी , डिप्लोमा इन टेक्सटाइल कलर एंड डिजाइन सर्टिफिकेट कोर्स इन वीविंग ऑफ मैनमेड फाइवर फैब्रिक्स, एडवांस डिप्लोमा इन कंप्यूटर एडेड टेक्सटाइल डिजाइनिंग आदि का उल्लेख किया जा सकता है। क्रिएटिव कोर्सेज में फैशन टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल डिजाइनिंग रेडिमेड गारमेंट कटिंग एंड टेलरिंग, क्वालिटी कंट्रोल आदि का नाम लिया जा सकता है। इन कोर्सेज में १२ से लेकर विभिन्न विधाओं में ग्रेजुएट युवा हिस्सा ले सकते हैं। प्रायः जॉब्स निजी क्षेत्र अथवा विदेशी ब्रांडेड कंपनियों में ज्यादा हैं। स्वरोजगार के अवसर भी मेहनती युवाओं के लिए पर्याप्त संस्था में उपलबध हो सकते हैं बशर्ते वे क्वालिटी कंट्रोल और अधिक प्रोफेशनल तौर तरीकों से काम करने की आदत डालें।
झलकियां
१. टेक्सटाइल एक्सपोर्ट्स के माध्यम से भारत की एक-चौथाई विदेशी मुद्रा की कमाई
२. देश के कुल उत्पादन का १४ प्रतिशत हिस्सा टेक्सटाइल उद्योग की बदौलत
३. देश के सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) का ३ प्रतिशत हिस्सा टेक्सटाइल उद्योग के कर्मियों की मेहनत का नतीजा
४. रोजगार सृजन की दृष्टि से टेक्सटाइल एवं वस्त्र उत्पादन क्षेत्र को शीर्ष के गिने-चुने उद्योगों में शामिल किया जा सकता है
५. वर्तमान में लगभग ३.५ करोड़ हाथों का रोजगारदाता है यह उद्योग
६. टेक्सटाइल उद्योग की निर्यात हिस्सेदारी वर्तमान के ४ प्रतिशत से बढ़कर आगामी पांच वर्षों में ७ प्रतिशत की उम्मीद
(अशोक सिंह,नई दुनिया,दिल्ली,27.9.2010)
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