जय कुमार गौरव जब छोटे थे, तब वह सुपरहीरो बनना चाहते थे। वह कैप्टन प्लैनेट बनना चाहते थे, जो प्रदूषण कम करने के लिए लड़ता है और धरती को हरा-भरा बनाता है। 24 साल के जय आज बचपन का सपना पूरा कर रहे हैं। उन्होंने 2008 में सिंदीकेतम कैपिटल मैनेजमेंट में बतौर एसोसिएट ज्वाइन किया। वह क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म (सीडीएम) मैनेजमेंट ऑफिसर के पद पर रहते हुए कंपनी को कार्बन फुटप्रिंट घटाने में मदद कर रहे हैं।
जय का कहना है, 'हम एमबीए कर सकते थे, लेकिन मेरी पहली प्राथमिकता साफ पर्यावरण है।' उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एन्वॉयरनमेंटल स्टडीज में ग्रेजुएशन किया है। जय ने टेरी के विश्वविद्यालय से एन्वॉयरनमेंटल साइंस में मास्टर डिग्री भी हासिल की है। जय की तरह कई होनहार नौजवानों की दिलचस्पी 'ग्रीन जॉब' में बढ़ रही है।
युनाइटेड नेशंस एन्वॉयरनमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) रिपोर्ट, 2008 के मुताबिक साल 2025 तक भारत में बायोगैस के क्षेत्र में ही सिर्फ 9 लाख नई नौकरियां होंगी। अनुमान के मुताबिक एन्वॉयरनमेंटल प्रोडक्ट्स और सविर्सेज का वैश्विक बाजार करीब 2.74 लाख करोड़ डॉलर का होगा।
हेडहंटर्स के आकलन के मुताबिक, अगले दो साल में भारत में करीब 10 लाख ग्रीन जॉब पैदा होंगे। मा फोई रैंड्सटैड के डायरेक्टर और प्रेसिडेंट ई बालाजी का कहना है, 'पहले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हेल्थ, सेफ्टी और एन्वॉयरनमेंट अधिकारियों की नियुक्ति सुरक्षा कारणों से की जाती थी। अब इस तरह के पद लगभग हर सेक्टर में हैं। कुछ कंपनियां तो चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर जैसे पद भी बना रही हैं।'
अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनी सूजलॉन ग्रुप ने मार्च, 2009 में टेरी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया था। सूजलॉन रिन्यूएबल एनर्जी इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में एमटेक इंस्टीट्यूट लेकर आ रही है। टेरी के रजिस्ट्रार राजीव सेठ का कहना है कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट की जरूरत है। पर्यावरण सुरक्षा के महत्व को देखते हुए वैज्ञानिकों, मैनेजरों और नेताओं को इन विषयों के बारे में संवेदनशील बनाना होगा। इस यूनिवर्सिटी में 2006 में 48 छात्र थे। इस समय यहां पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़कर 260 हो गई है।
साल 2006 में इन छात्रों को औसतन 2.5 लाख रुपए सालाना वेतन मिल रहा था, जो अब बढ़कर 4.5 लाख रुपए हो गया है। सेठ का कहना है, 'हमारे सभी छात्रों को टीसीएस, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और आईएलएंडएफएस सहित ग्रीन गतिविधियों में शामिल कंपनियों में प्लेसमेंट मिल रहा है।' भविष्य में रियल एस्टेट सेक्टर से सबसे अधिक रिक्रूटमेंट की उम्मीद है। रियल एस्टेट में ग्रीन बिल्डिंग कारोबार रफ्तार पकड़ रहा है।
विप्रो, माइक्रोसॉफ्ट, कॉग्निजेंट, टीसीएस, इंफोसिस और ऑरेकल जैसी कंपनियां ग्रीन ऑफिस में शिफ्ट करने में रुचि ले रही हैं। जेएलएल के हेड (रिसर्च एंड इंटेलीजेंस सर्विस) अभिषेक किरण गुप्ता का कहना है, 'आने वाले समय में ऐसे लोगों की अच्छी मांग रहेगी, जो ग्रीन बिल्डिंग को सर्टिफाइ कर सकें। साथ ही वैसे आर्किटेक्ट और प्रोजेक्ट प्लानरों की जरूरत होगी, जो ग्रीन बिल्डिंग नियमों के मुताबिक बिल्डिंग या प्रोजेक्ट बना सकें।'
इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय, पुणे विश्वविद्यालय, जेएनयू, दिल्ली में टेरी और मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, आईआईटी जैसे संस्थानों में बैचलर, मास्टर्स, एमटेक, एमई और पीएचडी में ग्रीन कोर्स को शामिल किया गया है। आईआईएम, अहमदाबाद और लखनऊ में कार्बन फाइनेंस कोर्स पढ़ाया जाता है। पर्यावरण बदलाव पर प्रधानमंत्री के पैनल सदस्य प्रदीप्तो घोष का कहना है, 'देश को एक खास स्किल वाले फ्रेशर्स की जरूरत है। कंपनियां तेजी से इन प्रतिभाओं को अपने साथ जोड़ रही हैं।'
जो लोग वैकल्पिक करियर के बारे में सोच रहे हैं, उन्हें ग्रीन सेक्टर से बेहतर अवसर मिल सकते हैं। एसीसी सीमेंट, इकोस्मार्ट, एसजीएस इंडिया, टीसीएस, रिलायंस एनर्जी और एमएंडएम इंटर्नशिप ऑफर कर रही हैं। ये कंपनियां इंटर्न को नौकरी भी दे रही हैं। उधर, मा फोई के बालाजी का कहना है कि शुरुआती चरण में छात्रों को सालाना 3.5-4.5 लाख रुपए ऑफर किए जा रहे हैं, वहीं मिडिल लेवल की नौकरी के लिए 14-20 लाख रुपए तो सीनियर प्रोफेशनलों को 45-60 लाख रुपए सालाना वेतन ऑफर किया जा रहा है(मनु बालचंद्रन / सुनयना चड्ढा / श्रीराधा बसु / ऋतंकर मुखर्जी,इकनॉमिक टाइम्स,17.8.2010)
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