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23 सितंबर 2010

मध्यप्रदेशःनाकाबिल वकील नहीं बन पाएंगे नोटरी!

प्रदेश में अब इंटरव्यु में काबिल साबित होने वाली वकील ही नोटरी बन सकेंगे। विधि मंत्री किसी वकील को नोटरी का लायसेंस देने की सिफारिश आसानी नहीं से नहीं कर पाएंगे।

गठित हुआ बोर्ड: बताया जाता है कि उन्हीं वकीलों को नोटरी का लायसेंस दिया जा सकेगा, जिनके बारे में साक्षात्कार बोर्ड सिफारिश करेगा। बोर्ड का गठन केंद्र सरकार के नए प्रावधान के तहत किया गया है। गौरतलब है कि किसी शपथ पत्र की तस्दीक करने एवं उसे अधिमान्य करने लिए अदालत में शपथ आयुक्त (ओथ कमिश्नर) होते हैं तथा कोर्ट के बाहर नोटरी रहते हैं। नोटरी का लायसेंस देने के बारे में केंद्र सरकार का नोटरी एक्ट 1952 है। इस अधिनियम के तहत हर राज्य में नोटरियों की संख्या भी निर्धारित की गई हैं।

अब यह होगी व्यवस्था: हाल ही में केंद्र सरकार ने नोटरी बनाने के नियमों में संशोधन कर दिया है जिसमें विभाग स्तर पर एक साक्षात्कार बोर्ड के गठन का प्रावधान है। मप्र के विभाग ने नए प्रावधान पर अमल के तहत नोटरियों के चयन का साक्षात्कार बोर्ड गठित कर दिया है। जिसमें विधि विभाग के सचिव अध्यक्ष हैं जबकि अपर सचिव न्यायिक शाखा- 2 तथा अपर सचिव न्यायिक शाखा- 1 सदस्य हैं। अब यह बोर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा भेजी सूची में शामिल वकीलों के इंटरव्यु लेगा। योग्यता के हिसाब से नंबर या ग्रेड देकर उनमें से नोटरी बनाने के लिए प्रस्ताव शासन के पास भेजेगा। विधि मंत्री साक्षात्कार बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार नोटरी का चयन करेंगे(सतीश आलिया,दैनिक भास्कर,भोपाल,23.9.2010)।

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