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08 सितंबर 2010

उत्तराखंड में एमबीए की दो हजार सीटें रिक्त

मैनेजमेंट कोर्स चला रहे सूबे के कालेजों में एमबीए की तकरीबन दो हजार रिक्त सीटों के लिए विद्यार्थियों का टोटा हो गया है। इन सीटों पर अब 50 फीसदी अंकों से स्नातक डिग्री लेने वाले सामान्य वर्ग के विद्यार्थी दाखिला ले सकेंगे। सूबे में तेजी से खोले गए मैनेजमेंट कालेजों को अब ढूंढने से भी विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं। मैनेजमेंट कोर्स चला रहे तकरीबन 40 शिक्षण संस्थाओं में 38 संबद्धता हासिल कर चुके हैं। नए दो शिक्षण संस्थाओं की संबद्धता की प्रक्रिया चल रही है। इन संस्थाओं में एमबीए की करीब 3500 सीटों में तकरीबन दो हजार सीटें खाली पड़ी हैं। इन सीटों को भरने के लिए मैट या कैट अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। राज्य को अपने सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में एमबीए कोर्स में भी बीटेक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। निजी कालेजों में बीटेक की रिक्त सीटें भरने के लिए इंटर पास और एमटेक की रिक्त सीटें भरने को महज बीटेक पास विद्यार्थियों को दाखिला देने की इजाजत दी गई है। एमबीए कोर्स में दाखिले को मैट या कैट उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता से कदम पीछे खींचे गए हैं। इस संबंध में उत्तराखंड तकनीकी विश्र्वविद्यालय के प्रस्ताव को शासन ने हरी झंडी दे रही हेै। आदेश के मुताबिक सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को स्नातक परीक्षा में न्यूनतम 50 फीसदी अंक और अनुसूचित जाति व जनजाति के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 45 फीसदी अंक होने पर एमबीए में दाखिला मिल सकेगा। दाखिला प्रक्रिया 15 सितंबर तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं(दैनिक जागरण,देहरादून,8.9.2010)।

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