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27 सितंबर 2010

उत्तराखंड का आयुर्वेद विभागःहाजिरी लगाओ,वेतन पाओ

संसाधनों के अभाव में आयुर्वेद चिकित्सक औपचारिकता निभाने को विवश है। नतीजा लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। वह भी तब जब विभाग की कमान सूबे के मुखिया के पास है। सूबे को आयुष प्रदेश बनाने का सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है। आयुर्वेद चिकित्सकों को ही ले लिया जाए। अरसे से आयुर्वेद चिकित्सकों की कमी महसूस की जा रही थी। इसे देखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत मई में 32 चिकित्सकों (संविदा) की नियुक्ति की घोषणा की गई। जरूरी औपचारिकताओं के पूरा किए जाने के बाद में इनकी तैनाती भी विभिन्न जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में की गई। पर वे यहां कहां और कैसे काम करेंगे इसका ख्याल रखना मुनासिब नहीं समझा गया। नतीजा यह है कि चार माह पूरे होने को हैं और चिकित्सकों के बैठने के लिए न तो यहां कमरे हैं और ना ही कोई फर्नीचर। यहां तक कि दवाओं की भी व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में चिकित्सक ड्यूटी पर तो जाते हैं पर हाजिरी लगाने के सिवाय उनके पास कोई काम नहीं है। जबकि मरीजों की लंबी कतार वहां लगी रहती है। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से मैदानी, दुर्गम व अतिदुर्गम क्षेत्र में तैनात चिकित्सकों को क्रमश:20, 24 व 28 हजार मानदेय मिल रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है आयुष प्रदेश का ख्वाब को पूरा करने को लेकर विभाग कितना संजीदा है। उधर इस बारे में हाल ही में मुख्यमंत्री कार्यालय के कड़े निर्देश के बाद विभाग हरकत में जरूर आया और यहां दवा पहुंचाने की कवायद शुरू की तो जा रही है पर डाक्टरों के बैठने और मरीजों को कैसे देखेंगे इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से इस तरह के मामले में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं किए जाने का सर्कुलर भी जारी किया गया है। पर विभाग है कि मानने को तैयार ही नहीं है। इस बारे में निदेशक (एनआरएचएम) डा.पीयूष सिंह का कहना है कि व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने का काम चल रहा है। विभाग की कोशिश है कि अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाय(दैनिक जागरण,देहरादून,27.9.2010)।

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