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08 सितंबर 2010

बिहार-बदलेगा कृषि विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम

प्रकृति एवं विज्ञान में निरंतर हो रहे बदलावों को देखते हुए देश भर के कृषि विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की गयी है। बिहार में भी कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी कर ली गई है। साथ ही नये विषयों से संबंधित महाविद्यालय खोलने की कार्रवाई भी तेज कर दी गयी है। बनी कोर कमेटी : कृषि विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में बदलाव व नये कालेज की स्थापना के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोर कमेटी गठित की गयी है। बिहार कृषि विश्र्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डा.मेवा लाल चौधरी ने बताया कि पाठ्यक्रमों में परिवर्तन के लिए गठित कोर कमेटी में देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों को रखा गया है। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डा.पंजाब सिंह, राष्ट्रीय किसान आयोग के पूर्व सदस्य आर.बी.सिंह, आईसीएआर के पूर्व उप महानिदेशक डा.सी.प्रसाद, डा.के. एल.चढ्ढा, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा.एस.एन.पुरी एवं राज्य के कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक कुमार सिन्हा हैं। कृषि तकनीक का विस्तार होगा : डा.चौधरी ने कहा कि दुनियाभर में कृषि के क्षेत्र में बदलाव हो रहे हैं। किसानों को नित नयी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कोर कमेटी की हाल में हुई पहली बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये हैं। यह भी निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में कृषि तकनीक का विस्तार करने की जरूरत है।

क्या-क्या शामिल होगा :

उन्होंने बताया कि कोर कमेटी की बैठक में तय हुआ कि कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में आपदा प्रबंधन को शामिल करने की जरूरत है। इसके अलावा पोस्ट हार्वेस्टिंग, फूड टेक्नोलाजी एवं इनवायरनमेंटल साइंस की पढ़ाई के लिए अलग-अलग महाविद्यालय स्थापित होने चाहिए। बिहार में इस दिशा में काम शुरू हो गया है। कृषि को उद्योग से जोड़ने के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने की भी कार्रवाई चल रही है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य है कि ऐसे पाठ्यक्रम विकसित किये जायें, जिससे छात्रों की नौकरी की गारंटी मिले। किसानों एवं कृषि मजदूरों को भी प्रशिक्षित करने की जरूरत है। कोर कमेटी राज्य में कृषि प्रशिक्षण के विस्तार पर भी जोर दे रही है(दैनिक जागरण,पटना,8.9.2010)।

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