भारत के आईटी सेक्टर को झटका देने की ओबामा प्रशासन की नीति पर अमल करते हुए अमेरिकी राज्य ओहियो ने बड़ी पहल कर दी है। इस राज्य में आईटी से जुड़े सरकारी कामकाज की भारत या किसी अन्य देश से आउटसोर्सिंग पर पाबंदी लगा दी गई है।
ओहियो प्रशासन के इस कदम से यह डर बढ़ गया है कि बाकी राज्य भी इसी तरह का कदम उठा सकते हैं। अमेरिका में इस समय बेरोजगारी की दर काफी बढ़ रही है और अर्थव्यवस्था में दो साल पुरानी मंदी के समय के लक्षण लौटते दिखाई दे रहे हैं। इसलिए भी आशंका है कि बाकी अमेरिकी राज्य भी ओहियो की तरह विदेशों से आउटसोर्सिंग पर लगाम लगाने संबंधी फैसले ले सकते हैं। इसका सीधा असर भारतीय आईटी सेक्टर को काम के मौकों की कमी के रूप में उठाना पड़ सकता है।
ओहियो के गवर्नर ने विदेशों से आउटसोर्सिंग बंद कराने संबंधी आदेश में जो कहा है, वह और भी चिंता की बात है। गवर्नर टेड स्ट्रिकलैंड ने आदेश में लिखा है कि विदेशी सर्विस प्रोवाइडर्स काम में देरी करते हैं और उनके काम की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है।
हाल ही में वीजा शुल्क बढ़ाए जाने के अमेरिकी प्रशासन के फैसले से झटका खा चुके भारतीय आईटी सेक्टर के लिए यह नया झटका है। भारत में आईटी सेक्टर में सालाना 50 अरब डॉलर का आउटसोर्सिंग कारोबार होता है। इसका बड़ा हिस्सा अमेरिका से ही आता है। अमेरिकी फर्मों को भारत में सस्ते में अच्छा काम मिल जाता है, जिसका फायदा वे खूब उठा रही हैं। आईटी क्षेत्र में भारत में 30 लाख से भी ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। रकम और रोजगार के हिसाब से भारतीय आईटी सेक्टर की विशालता को देखते हुए वैसे भी भारत, अमेरिका के निशाने पर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा शुरू से आउटसोर्सिंग पर लगाम लगाए जाने के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ते समय भी प्रचार अभियान में इसे अहम मुद्दा बनाया था। अभी मध्यावधि चुनाव में भी वह इसे प्रमुख मुद्दे के तौर पर उभार रहे हैं। उनका कहना है कि आउटसोर्सिंग पर लगाम लगा कर देश में बढ़ती बेरोजगारी दर पर अंकुश लगाया जा सकता है। ओबामा कह चुके हैं कि भारत से आउटसोर्सिंग कराने वाली अमेरिकी कंपनियों को टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलेगा। उन्होंने हाल ही में वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले को मंजूरी देकर भी भारतीय आईटी कंपनियों को परोक्ष रूप से झटका दिया है।
एक्सपर्ट्स स्पीक
'ग्लोबलाइजेशन के दौर में अमेरिकी राज्य का यह फैसला निराशाजनक है। इस फैसले का भारत के आईटी उद्योग पर असर पड़ेगा। इससे अमेरिका की बेरोज़गारी की समस्या थोड़ी बहुत हल होगी, लेकिन भारत के लिए यह अच्छा फैसला नहीं है।'
- पी.मोहनदास पाई, डाइरेक्टर, इन्फोसिस
'अमेरिका की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे फैसले अमेरिका की नाजुक हालत की ओर इशारा करते हैं। इस फैसले से भारतीय आईटी उद्योग को नुकसान होगा।'
- सुब्रतो बागची, वाइस प्रेसिडेंट, माइंडट्री
(बिजनेस भास्कर,दिल्ली,8.9.2010)
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