सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने पिछले पांच वर्षो में भले ही कर्मचारियों की संख्या में कटौती की हो, लेकिन आने वाले तीन वर्षो में उनकी अधिकारियों व लिपिकों की संख्या में खासी वृद्धि करने की योजना है। सरकारी बैंक वर्ष 2010 से लेकर वर्ष 2013 के बीच 31 हजार अधिकारियों और 51 हजार लिपिकों की भर्ती करने की योजना बना रहे हैं। ये भर्तियां इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) के जरिए होंगी। केंद्र सरकार ने बैंकों के लिए आईबीपीएस के जरिए संयुक्त परीक्षा आयोजित कराने का फैसला किया है। इस बारे में वित्त मंत्रालय की तरफ से सूचना दी गई है कि डॉ. एके खंडेलवाल समिति की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला किया गया है। अभी तक कुछ चयनित बैंक ही अपने लिए आईबीपीएस के जरिए प्रतियोगिताएं आयोजित करा रहे थे। लेकिन अब आईबीपीएस आयोजित करेगाखंडेलवाल समिति की सिफारिशों पर भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के मंच पर बैंकों के बीच काफी विचार विमर्श हुआ है। उसके बाद ही आईबीए ने केंद्र सरकार को यह सुझाव दिया था कि समिति के नियुक्त संबंधी सुझाव को स्वीकार किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया है। खंडेलवाल समिति ने बैंक कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि, उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था, कैरियर प्लानिंग आदि पर भी सुझाव दिए हैं।(दैनिक जागरण,दिल्ली,28.9.2010)।
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