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28 सितंबर 2010

निजी क्षेत्र में आरक्षण पर सरकार ने बनाया दबाव

निजी कंपनियों में पिछड़े तबके के लिए नौकरी में आरक्षण को लेकर सरकार ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। भारतीय उद्योग जगत से कहा गया है कि वह इस बात की हर तिमाही में रिपोर्ट दे कि उसके यहां अनुसूचित जाति, जनजाति समेत समाज के कमजोर वर्ग के के लिए कितनी नौकरियों का सृजन किया गया है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक इससे पहले औद्योगिक नीति एवं संवर्धन बोर्ड को इस तरह की रिपोर्ट सालाना आधार पर जमा करानी पड़ती थी। संप्रग सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय न्यूनतम साझा कार्यक्रम में निजी क्षेत्र के रोजगारों में आरक्षण या स्वैच्छिक कार्रवाई को शामिल किया था। फिलहाल सरकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के रोजगारों में अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य तबकों के लिए आरक्षण है। शिक्षा में भी उनके लिए कोटा तय किया गया है। हालांकि इंडिया इंक निजी क्षेत्र में आरक्षण के पक्ष में नहीं हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पिछले माह सीआईआई, फिक्की तथा एसोचैम सहित उद्योग संगठनों की बैठक बुलाई थी। तब इस बात पर चर्चा की गई थी कि क्या वे अपने सदस्यों से पांच प्रतिशत रोजगार कमजोर तबके के लिए आरक्षित करने को कहेंगे। बैठक में उद्योग जगत ने आश्वासन दिया था कि उसकी ओर से प्रबंधक स्तर तक के पदों में अनुसूचित जाति, जनजाति प्रत्याशियों को वरीयता दी जाएगी(दैनिक जागरण,दिल्ली,28.9.2010)।

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