सिविल सर्विसेज की तर्ज पर अब देशभर में पंचायत सर्विसेज नाम से एक नया कैडर बनने जा रहा है। इसका गठन हर राज्य अपने स्तर पर करेगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन पर कई राज्यों ने कुछ आपत्तियों के साथ सैद्धांतिक तौर सहमति भी जता दी है।
महात्मा राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), सर्वशिक्षा अभियान, स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार गंभीर नजर आ रही है। इसके लिए पंचायतों पर दायित्व बढ़ गया है, लेकिन उनके पास इसके लिए प्रतिबद्ध अमला नहीं है। इसी कमी को पूरा करने केंद्र ने नए कैडर का प्रस्ताव दिया है।
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, पहले चरण में उन्हीं जिलों में कैडर का गठन किया जाएगा जहां वर्ष 2009-10 के दौरान मनरेगा के तहत 100 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य का कार्य हुआ है।
पंचायत कैडर में कौन?
केंद्र सरकार के बैकग्राउंड नोट के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत में चार प्रकार के पद होंगे। एक, पंचायत विकास अधिकारी, दो, जूनियर इंजीनियर, तीन, एकाउंटेंट कम डाटा एंट्री ऑपरेटर और चार, असिस्टेंट एक्सटेंशन ऑफिसर। पंचायत विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायत विकास अधिकारी और एकाउंटेंट कम डाटा एंट्री ऑपरेटर पर सहमत जताई है, लेकिन जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट एक्टेंशन ऑफिसर केवल क्लस्टर लेवल पर ही होंगे।
पैसा कहां से आएगा
केंद्र ने कैडर गठन के लिए पहले साल 80 फीसदी अंशदान का प्रस्ताव दिया है जो अगले आठ सालों के दौरान हर साल 10 फीसदी की दर से घटता जाएगा। हालांकि यह पैसा 6 फीसदी राशि में समायोजित किया जाएगा जो अभी केंद्र मनरेगा के तहत प्रशासनिक व्यय में देती है। कई राज्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि केंद्र को पूरी तरह अलग से धनराशि आवंटित करनी चाहिए।
पंचायतों में कर्मचारी की सभी जगहों पर है, लेकिन इनकी संख्या इतनी ज्यादा होगी कि पहले इसके वित्तीय पहलुओं पर विचार करना होगा।
(ए.जयजीत,दैनिक भास्कर,भोपाल,29.9.2010)

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