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30 सितंबर 2010

कश्मीरी जनता स्कूल खोलने के समर्थन में

कश्मीर में राज्य सरकार और अलगाववादियों की राजनीति में बच्चों की जान खतरे में प़ड़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार द्वारा स्कूलों को खोलने की कवायद का कश्मीरी जनता द्वारा समर्थन किए जाने से अलगाववादियों के साथ-साथ आतंकी भी चि़ढ़ गए हैं। नतीजतन स्कूल जाने वाले बच्चों की जान पर बन आई है। हालांकि स्कूलों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं पर कश्मीरी इस विरोध के चलते बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए हैं।

हालांकि कश्मीर घाटी में प्रशासन की ओर से कर्फ्यू में ढील दिए जाने और अलगाववादियों द्वारा एक दिन के लिए सामान्य स्थिति बहाल किए जाने की अपील के बाद बुधवार को श्रीनगर में जनजीवन पटरी पर लौट आया तथा स्कूलों में भी उपस्थिति पहले के मुकाबले ज्यादा हो गई। पर स्कूल जाते बच्चे अलगाववादियों तथा आतंकियों की नजरों में कांटा बनने लगे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि श्रीनगर के कई स्कूलों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ८५ फीसदी तक रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर के ज्यादातर इलाकों से सुबह १० बजे से कर्फ्यू हटा लिया गया था। यद्यपि उत्तरी कश्मीर के सोपोर, बारामुल्ला और कुपवा़ड़ा कस्बों में कर्फ्यू जारी है। पुलिस के अनुसार श्रीनगर के पुराना शहर इलाके के दो थाना क्षेत्रों से कर्फ्यू नहीं हटाया गया है क्योंकि सूचना मिली थी कुछ लोग हिंसा भ़ड़का सकते हैं।

श्रीनगर में दुकानें, सार्वजनिक यातायात, कारोबारी प्रतिष्ठान, डाकघर और शैक्षणिक संस्थान खुले रहे। प्रशासन का दावा है कि शुरू हुए स्कूलों में उपस्थिति बुधवार को ज्यादा रही। यहां लंबे समय बाद सोमवार को स्कूल खुले थे। अलगाववादियों की मर्जी के विरूद्घ स्कूलों को खुलवाने की राज्य सरकार की कवायद छात्रों के अभिभावकों को चिंता में भी डाल रही है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि चिंता इसके प्रति है कि अलगाववादी तथा आतंकी गुटों द्वारा अपने बच्चों को स्कूल भिजवाने वाले परिवारों को "देख लेने" तथा "परिणाम भुगतने" की चेतावनी भी दी जा रही है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर दोराहे पर आ ख़ड़े हुए हैं। रसूखदार परिवार बच्चों को जम्मू तथा देश के अन्य भागों में शिफ्ट करने में जुट गए हैं पर गरीब तबके के कश्मीरी ऐसा नहीं कर पा रहे हैं(नई दुनिया,दिल्ली,30.9.2010)।

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